उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सीएम चेहरा हो सकती हैं शीला !

Jun 16, 2016
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 78 वर्षीय शीला दीक्षित उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा हो सकती है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद की प्रत्याशी के रूप में पेश कर सकती है। दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। एक समय तक कांग्रेस का गढ़ रहे उत्तर प्रदेश पर कांग्रेस की नजरें जमी हुई हैं।

दीक्षित की पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद उन्हें प्रत्याशी बनाने की अटकलें गुरुवार को चरम पर रही। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने सुझाव में कहा है कि राज्य के चुनाव प्रचार में दीक्षित महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उत्तर प्रदेश में ब्राह्माण मतदाताओं की अच्छी संख्या को देखते हुए किशोर ने यह सुझाव दिया है। दीक्षित ब्राह्मण समुदाय से आती हैं और राज्य के प्रमुख कांग्रेस नेता रहे दिवंगत उमाशंकर दीक्षित की बहू हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन फिर से हासिल करने के प्रयास में जुटी है। पारंपरिक रूप से कांग्रेस का वोट बैंक रहे ब्राह्माण समुदाय का रुख भाजपा की ओर हो गया। मंदिर-मंडल की राजनीति इसका मुख्य कारण रहा है। बड़ी संख्या में ब्राह्माण मत मायावती की बीएसपी के खाते में भी गया। मायावती ने इस समुदाय से कई प्रत्याशियों को मैदान में उतार कर वोट बैंक हथिया लिया था। आज स्थिति यह है कि 403 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी के पास केवल 30 विधायक हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केवल अमेठी और रायबरेली सीट जीत सकी।

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जानिए, शीला दीक्षित का यूपी कनेक्शन

शीला दीक्षित के परिवार के रिश्ते उत्तर प्रदेश से रहे हैं। शीला दीक्षित के ससुर उमा शंकर दीक्षित उत्तर प्रदेश से ही थे। उमा शंकर कांग्रेस के प्रख्यात नेता होने के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल भी रह थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने का प्रस्ताव रखा था, परंंतु इस प्रस्ताव को रोक दिया गया।

यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी की क्या होगी भूमिका

बताया जा रहा है साथ ही प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का जनाधार, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से बहुत पीछे हैंं। प्रियंका गांधी ने खुद को अभी तक अमेठी और रायबरेली तक ही ‌सीमित रखा और यहीं पर चुनाव प्रचार किया है। यह दोनों संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के खाते में आते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी की मांग है और समय आ गया है कि प्रियंका गांधी पार्टी का प्रचार अन्य राज्यों में भी करें। उत्तर प्रदेश विधानसभा की 404 सीटों में से कांग्रेस के खाते में मात्र 30 सीट ही हैं।

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