बुलदंशहर गैंगरेप के पीड़ितों ने मांगा घर, सुरक्षा, नौकरी

Sep 07, 2016
बुलदंशहर गैंगरेप के पीड़ितों ने मांगा घर, सुरक्षा, नौकरी
बुलंदशहर गैंगरेप कांड के पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर घर, नौकरी की मांग की है।

नई दिल्ली, (माला दीक्षित)। बुलंदशहर दुष्कर्म कांड के पीडि़तों ने सम्मान से जीवन यापन की दुहाई देते हुए सुरक्षा, घर और उचित मुआवजा दिलाने के साथ नाबालिग पीड़िता की शिक्षा के इंतजाम और बालिग को नौकरी दिये जाने की गुहार लगाई है। पीड़िता की ओर से इसको लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई।

उधर दूसरी ओर सीबीआइ ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मामले में पक्षकार बनाए जाने और जांच पर लगी रोक हटाने की मांग की है। इन दोनों अर्जियों पर फिलहाल तो सुनवाई की कोई तिथि तय नहीं है, लेकिन पक्षकार इसी सप्ताह कोर्ट से जल्दी सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं। इसके लिए सीबीआइ ने एक अर्जेन्सी अर्जी भी दी है।

गौरतलब है कि बुलंदशहर के पास हाईवे पर गत 29 जुलाई की रात अपराधियों ने कार रोक कर परिवार को बंधक बना कर 14 वर्ष की नाबालिग और उसकी मां से सामूहिक दुष्कर्म किया था। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों की याचिका पर न सिर्फ जांच पर अंतरिम रोक लगा दी थी बल्कि घटना के बारे में टिप्पणी करने पर उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान को नोटिस भी जारी किया है। उस याचिका में पीडि़तों ने मामला उत्तर प्रदेश से बाहर दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है।

मंगलवार को पीड़ितों ने वकील किसलय पांडेय के जरिये एक नयी अर्जी दाखिल की। जिसमें घटना और परिस्थितियों का ब्योरा देते हुए कोर्ट से कुछ अंतरिम आदेश मांगे गये हैं। अर्जी में कहा गया है कि जांच एजेंसी को समय से जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने का आदेश दिया जाए ताकि अभियुक्त देरी से आरोपपत्र का लाभ लेकर हिरासत से न छूट जाएं। कोर्ट जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगे और जांच की निगरानी करे। कोर्ट पीडि़तों को उचित मुआवजा देने का निर्देश दे ताकि वे सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें। उन्हें सुरक्षा दी जाए और पीडि़त नाबालिग की शिक्षा का इंतजाम किया जाए। पीडि़ता को सुरक्षित आवास मुहैया कराया जाये जहां वह परिवार के साथ सम्मान से रह सके। इतना ही नहीं पीडि़ता और उसके परिवार को जीवन यापन के लिए नौकरी भी दिलाई जाए।

सीबीआइ की जांच से रोक हटाने की मांग

उधर सीबीआइ ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दाखिल कर जांच पर लगी रोक हटाने का अनुरोध किया है। एजेंसी ने कानून का हवाला देते हुए कहा है कि अगर अभियुक्तों की गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर जांच पूरी करके आरोपपत्र नहीं दाखिल किया गया तो आरोपी कानून का लाभ उठा कर रिहा हो जाएंगे। एजेंसी ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश पर उसने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट अपने गत 29 अगस्त के आदेश में संशोधन करते हुए जांच पर लगी रोक हटा दे। एजेंसी का कहना है कि जांच पर रोक लगी रहने से मामले से जुड़े अहम साक्ष्य खतम हो सकते हैं साथ ही कानून में जांच पूरी करने के लिए तय 90 दिन की समय सीमा भी बीत रही है।

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