हमारा लोकतंत्र न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के स्तंभों पर टिका है: राष्ट्रपति

Aug 14, 2016
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमारा लोकतंत्र न्याय,स्वछंदता,समानता और भाईचारे के स्तंभ पर टिका है।

नई दिल्ली। 70 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमारा लोकतंत्र न्याय,स्वछंदता,समानता और भाईचारे के स्तंभ पर टिका है।

देश के सभी भाई-बहनों का राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अभिवादन किया। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आजादी दिलाने वाले नायकों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि मैं आज पांचवीं बार स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आपसे बात कर रहा हूं। जब 1947 में भारत को आजादी मिली थी, तब किसी को भरोसा नहीं था कि भारत एक लोकतंत्र के रूप में जीवित रह सकेगा। आजादी के 7 दशक बाद, करीब 125 करोड़ की भारत की जनता ने अपनी विभिन्नता के जरिए तब की भविष्यवाणी को गलत साबित कर दिया।

उन्होंने कहा कि अगर हम अपने बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते,तब स्वयं को सभ्य समाज का नहीं कह सकते। कमजोर वर्ग पर हो रहे हमले पर हमें सख्ती से निपटना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी बिल का पास होना हमारे लोकतंत्र के लिए हर्ष की बात है।

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