विजन दस्तावेज पर विचार को नीति आयोग ने बुलाई राज्यों की बैठक

Jul 19, 2016
आयोग के सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में मुख्य सचिवों के अलावा राज्यों के योजना विभागों के प्रधान सचिव भी शामिल होंगे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। छह दशकों से चल रही पंचवर्षीय योजनाओं की व्यवस्था को खत्म करने के बाद नीति आयोग अब सात वर्षीय रणनीतिक योजनाएं और 15 वर्षीय विजन दस्तावेज तैयार करने में जुट गया है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए आयोग ने इस महीने के अंतिम सप्ताह में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक बुलायी है। इस बैठक में प्रस्तावित विजन दस्तावेज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

आयोग के सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में मुख्य सचिवों के अलावा राज्यों के योजना विभागों के प्रधान सचिव भी शामिल होंगे। इस बैठक के आधार पर राज्य सरकारें भी अपने-अपने यहां विजन दस्तावेज और रणनीतिक योजनाओं का मसौदा तैयार करने की दिशा तय की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्र की तरह राज्यों मंे भी विजन दस्तावेज, रणनीतिक योजनाएं और तीन वर्षीय कार्य योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसलिए नीति आयोग ने सभी राज्यों को इस बैठक के लिए बुलाया है।

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यह बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि जल्द ही नीति आयोग की गवर्निग काउंसिल की बैठक होने वाली है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली गवर्निग काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि गवर्निग काउंसिल की बैठक 15 अगस्त के बाद होगी। सूत्रों ने कहा कि 27 जुलाई को होने वाली इस बैठक में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों तथा बिजली, पानी और सड़क जैसी ढांचागत सुविधाओं के संबंध में राज्यों में विजन तैयार करने पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय विकास का एजेंडा देश में व्यापक बदलाव की आधारशिला रखेगा।

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आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि हमारा मकसद अगले 15 वर्षो में आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने की योजना तैयार करना है। यह पूर्ववर्ती पंचवर्षीय योजनाओं से बिल्कुल भिन्न होगा। उल्लेखनीय है कि फिलहाल 12वीं पंचवर्षीय योजना चल रही है जो अगले साल मार्च में समाप्त होगी। नीति आयोग पहले ही घोषणा कर चुका है कि इसके बाद अगली पंचवर्षीय योजना नहीं आएगी। सूत्रों ने कहा कि नीति आयोग जो रणनीतिक योजना तैयार कर रहा है वज वित्त आयोग की सिफारिशों की अवधि को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है कि राज्यों को पहले से ही इस बात का अनुमान हो कि उन्हें कितनी धनराशि विकास कार्यो के लिए मिलेगी।

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