भागवत बोले- भारत के बुरे के लिए पाक को खुद की नाक काटने से भी परहेज नहीं

Aug 06, 2016
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान पर निशाना साधा।

इंदौर। छत्रपति शिवाजी के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘शक निर्माता शिवराय" के विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत शिक्षक की भूमिका में नजर आए। शुक्रवार को रविंद्र नाट्यगृह में बोलते हुए उन्होंने शिवाजी के जीवन चरित्र को आधार बनाकर बगैर नाम लिए पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया तो कभी राजनेताओं को भी खरी-खरी सीख दी। बात-बात में कम्युनिजम, सांप्रदायिकता की दुहाई देने वालों को भी भागवत ने समझाईश दी।

पाकिस्तान के लिए …खुद नुकसान उठाकर हमारे लिए अपशकुन

हाल ही में पाकिस्तान में हुए दक्षेस सम्मेलन में गृहमंत्री राजनाथसिंह के साथ हुए व्यवहार पर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की। पाकिस्तान का नाम लिए बिना भागवत ने कहा कि द्वेष की पराकाष्ठा तो ऐसी है हमारी अपनी हालत पतली है लेकिन हम अपनी नाक काटकर भी पडोसी के लिए अपशकुन करेंगे। हमारा पडोसी ऐसा ही बर्ताव करता है। पडोसी बन गए, ठीक है बन गए। हम मदद करने के लिए भी तैयार हैं। हमारी मदद से अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। हम बार-बार दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाते हैं लेकिन वो ऐसी परिस्थिति पैदा करता है कि हम आगे नहीं बढ़ सकें।

दुनिया के लिए… भारत सिर्फ भारतीयों का

भागवत ने दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि हम कौन हैं इस बारे में हमारे ही मन में भ्रम है। एक कपट जाल हमारी बुद्धी के आसपास बुना गया है। उसी भ्रम के टूटे आईने में हम अपने आपको देखते हैं तो हमें एक नजर ही नहीं आता अलग-अलग नजर आता है। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत किसका है। भारत सिर्फ भारतीयों का है। भारतीय स्वभाव होने के नाते हम अपने यहां आने वालों का अच्छा आथित्य करेंगे। लेकिन बिना यहां का बने कोई हमारा प्रभु बनेगा तो यह नहीं चलेगा। भारत सारे विश्व को अपना कुटुंब मानता है। यह हमारी मजबूती है। कोई इसे कमजोरी मानकर भारत में भारत को दबाने की कोशिश करेगा तो यह नहीं चलेगा।

सरकार के लिए…जनसंख्या संतुलन का समर्थन

शिवाजी चरित्र के बहाने उन्होंने जनसंख्या संतुलन की नीति का एक बार फिर समर्थन किया। भागवत ने कहा उदार प्रजा का देश में बहुसंख्यक होना आवश्यक है। शिवाजी जनसंख्या संतुलन और असंतुलन का महत्व जानते थे। इसलिए उन्होंने लोगों को वापस अपने धर्म में लिया। अपने घर की लड़की उनके घरों में दी।

राजनेताओं के लिए…

शिवाजी ने जो पत्र अपने कर्मचारियों को लिखे उन्हें आज के दौर की सरकारों को पढ़ना चाहिए। इससे उनके कारोबार गुड गर्वनेंस में बदलेंगे। शिवाजी के साथियों जैसी टीम यूं ही तैयार नहीं होती बल्कि अपना उदाहरण सामने रखकर प्राणों से ज्यादा स्नेह देना होता है। कम्यूनलिज्म, सेक्युलर जैसे भ्रम फैलाने वाले शब्द नहीं थे।

स्वयंसेवकों के लिए…

संघ के संस्थापकों ने व्यक्ति को आदर्श नहीं मानते हुए तत्व के रुप में ध्वज को गुरू माना। लेकिन इस देश में बहुसंख्यक लोग सगुण उपासक है। यदि मूर्ति चाहिए ही तो स्वयं सेवकों पौराणिक काल के देव हनुमान और शिवाजी को आदर्श मानना चाहिए।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास दिल्ली के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा, पुस्तक के लेखक सद्गुरू विजय देशमुख न्यास के अध्यक्ष अजय राव देशमुख और हिंदी अनुवाद करने वाले इंदौर के डा.मोहन बांडे भी मौजूद थे। पुस्तक की पहली प्रति महापौर मालिनी गौड़ ने डॉ.भागवत के हाथों से ली। इस दौरान अण्णा महाराज, दादू महाराज, संघ के प्रांत प्रचारक पराग अभ्यंकर, विभाग संघ चालकलक्ष्मण राव नवाथे, विधायक उषा ठाकुर, जस्टिस वीएस कोकजे आदि मौजूद थे।

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