ओबीसी आरक्षण रक्षा समिति ने सुप्रीमकोर्ट में दाखिल की कैविएट

Jun 03, 2016
सुप्रीमकोर्ट से जाट आरक्षण रद होने के बाद हरियाणा ने नया कानून लाकर जाटों को आरक्षण दिया है। राज्य के नये आरक्षण कानून को भी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। हरियाणा में जाट आरक्षण का विरोध करने वाली संस्था भी सुप्रीमकोर्ट पहुंच गई है। गुरुवार को ओबीसी आरक्षण रक्षा समिति ने सुप्रीमकोर्ट में कैविएट दाखिल की ताकि जाट आरक्षण मामले पर कोर्ट कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष भी सुने।

सुप्रीमकोर्ट से जाट आरक्षण रद होने के बाद हरियाणा ने नया कानून लाकर जाटों को आरक्षण दिया है। राज्य के नये आरक्षण कानून को भी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए गत 26 मई को हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण कानून पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ एक जून को जाट आरक्षण का समर्थन करने वाली संस्था अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अपने अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान के जरिये सुप्रीमकोर्ट मे याचिका दाखिल की है। अब अगले ही दिन आरक्षण का विरोध करने वाली संस्था ओबीसी आरक्षण समिति भी कैविएट दाखिल कर सुप्रीमकोर्ट पहुंच गई है। मालूम हो कि इससे पहले 2014 में जाट आरक्षण रद करने के सुप्रीमकोर्ट में लंबित मामले में भी ओबीसी आरक्षण रक्षा समिति याचिकाकर्ताओँ में से थी।

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हरियाणा विधानसभा ने गत 29 मार्च को सर्वसम्मति से कानून पारित कर राज्य में जाट और पांच अन्य जातियों को पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत आरक्षण दे दिया था। आरक्षण पाने वाले समुदायों में जाट, जट सिख, मुस्लिम जाट, बिश्नोई, रोर और त्यागी शामिल हैं। इन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में दाखिले में दस फीसद आरक्षण दिया गया है।

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