अब “फेल” छात्र भी बन सकेंगे डॉक्टर!

Aug 18, 2016
पैसे देकर बिना प्रतिभा के डॉक्टरी में दाखिला पाने पर अंकुश लगाने की मुहिम इस साल भी कामयाब नहीं हो पा रही।

मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली। पैसे देकर बिना प्रतिभा के डॉक्टरी में दाखिला पाने पर अंकुश लगाने की मुहिम इस साल भी कामयाब नहीं हो पा रही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रही "राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा" (नीट) में उन छात्रों को भी उत्तीर्ण कर दिया गया जिनको इस परीक्षा में महज 16 फीसद अंक मिले हैं।

इसी तरह तीन में से दो विषयों में फेल होने वाले भी यहां पास माने गए हैं। ऐसे में पास करार दिए गए छात्रों से निजी मेडिकल कालेजों ने अभी से रिश्वत देकर दाखिले के लिए संपर्क करना शुरू कर दिया है।

एमबीबीएस और बीडीएस के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जारी हुए नीट परीक्षा के नतीजे कई मायने में हैरान करने वाले हैं। तीन विषयों की कुल 720 अंकों के लिए हुई इस परीक्षा में सामान्य श्रेणी के छात्रों को 145 अंकों में और आरक्षित श्रेणी के छात्रों को 118 अंकों में पास करार दिया गया है।

इस तरह सामान्य श्रेणी के लिए यह महज 20 फीसद और आरक्षित श्रेणी के लिए 16 फीसद ही होते हैं। हैरानी की बात है कि भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के तीन विषयों में हुई परीक्षा में से दो-दो विषयों में फेल छात्र भी डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए उपयुक्त माने गए हैं। नीट उत्तीर्ण छात्रों में से कुछ के अंक तो माइनस मार्किंग की वजह से शून्य से भी कम यानी माइनस में भी हैं।

नीट परीक्षा के लागू होने से छात्रों को कई सहूलियत हुई हैं। इसी तरह निजी कालेजों की ओर से होने वाली परीक्षा पर धांधली के गंभीर आरोप लगते थे, जिसकी अब गुंजाइश नहीं रह गई है। मगर यह पूरी प्रक्रिया निजी कालेजों में दाखिले में रिश्वत के खेल पर रोक नहीं लगा पाई है। क्योंकि निजी कालेजों के दाखिले के लिए पूरी स्पष्टता नहीं लाई गई है।

मंगलवार को नतीजे आने के साथ ही उत्तीर्ण होने वाले छात्रों के पास मेडिकल कालेजों के बिचौलियों ने सीधे संपर्क करना शुरू कर दिया है। इन्हें 25 लाख से 45 लाख की रिश्वत के एवज में एमबीबीएस की सीट का ऑफर किया जा रहा है।

इस बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसका समाधान यही है कि निजी कालेजों की सभी सीटों पर भी दाखिला सरकारी काउंसिलिंग के जरिए ही हो। पिछले हफ्ते मंत्रालय ने सभी राज्यों को एडवाइजरी भी जारी की है कि वे अपने यहां की सभी सीटों के लिए साझा काउंसलिंग करें। इसमें निजी कालेज भी शामिल हैं। मगर ये भी मानते हैं कि यह सीधा निर्देश नहीं है।

इसलिए अधिकांश राज्य इसका पालन नहीं करने वाले हैं। केंद्र सरकार सिर्फ सरकारी मेडिकल कालेजों की 15 फीसद सीटों के लिए केंद्रीय स्तर पर काउंसलिंग कर उम्मीदवार तय करती है। इससे पहले जहां ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआइपीएमटी) में 50 फीसद अंकों के आधार पर उत्तीर्ण किया जा रहा था, नीट में इसे 50 परसेंटाइल कर दिया गया है। जबकि आरक्षित वर्ग के लिए यह 40 परसेंटाइल है।

इस संबंध में यह परीक्षा आयोजित करने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का कहना है कि उसे जो पैमाना तय कर के दिया गया था, उसी के आधार पर उसने छात्रों को उत्तीर्ण घोषित किया है। उधर, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अली रिजवी कहते हैं कि इससे पहले 2013 में जब नीट आयोजित की गई थी, तभी इसमें उत्तीर्ण होने का पैमाना 50 परसेंटाइल को ही रखा गया था। जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा के नेतृत्व में बनाई गई निगरानी समिति से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही।

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