ये हैं भिखारियों के देवता, दुनिया से जाने के बाद भी करते रहेंगे मदद

Jun 10, 2016
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के एक युवक ने भिखारियों की मदद के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ़ा है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के एक युवक ने भिखारियों की मदद के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ़ा है। उन्होंने भिखारियों को पैसे देने के लिए एमआइएस (मासिक आय योजना) खाता खुलवाया है।

नदिया जिले के छपरा श्रीनगर इलाके में रहनेवाले निखिल शाह की सीमेंट की डीलरशिप है और वह एक दुकान चलाते हैं। उनके पास कुछ भिखारी रोजाना भीख मांगने आते थे। वह उसे रोज कुछ पैसे दे देते थे। लेकिन 2011 में एक दिन उनकी पत्नी ने उन्हें एक नायाब आइडिया सुझाया।

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पत्नी ने उन्हें सलाह दी कि हर दिन कुछ पैसे देने से अच्छा है कि आप उन्हें एक साथ हफ्तेभर का पैसा दे दें। निखिल को पत्नी की सलाह बहुत अच्छी लगी और उन्होंने हफ्ते की बजाय हर महीने के अंत में प्रत्येक भिखारी को 10 रुपये देना शुरू कर दिया। इस तरह करीब 200 भिखारी उनकी लिस्ट में शामिल हो गए जिन्हें हर माह वह 10 रुपये देते।

यह सिलसिला चलने के दौरान ही एक दिन निखिल ने सोचा कि उनकी मौत के बाद इनका क्या होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने 80 अन्य लोगों के साथ मिलकर चार लाख रुपये इकट्ठा किए और एक एमआइएस खाता खुलवाया। पहचान के लिए उन्होंने सभी 200 भिखारियों के पहचान पत्र भी बनवाए हैं।

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निखिल भिखारियों के लिए अब इसी खाते में हर माह मदद के रुपये जमा करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अब अपने विश्वासपात्र लोगों की एक समिति भी गठित करना चाहते हैं ताकि इन 200 भिखारियों को इस जमा धनराशि में से पैसा दे सकें और उसका प्रबंधन कर सकें।

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