मेडिकल बोर्ड करेगा युवती की जांच 20 सप्ताह बाद गर्भपात का मामला

Jul 23, 2016
20 सप्ताह बाद गर्भपात के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को एक मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिया है। केईएम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भ्रूण में विकृतियों का हवाला दे 24 सप्ताह बाद गर्भपात की इजाजत मांग रही युवती की सेहत की जांच मुंबई के अस्पताल का मेडिकल बोर्ड करेगा। सुप्रीमकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को मुंबई के केईएम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड शनिवार को युवती की जांच करेगा और सोमवार को उसकी रिपोर्ट सुप्रीमकोर्ट में पेश की जाएगी। कोर्ट सोमवार को इस मामले में फिर सुनवाई करेगा। ये निर्देश न्यायमूर्ति जेएस खेहर व न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने युवती के वकील और केंद्र तथा महाराष्ट्र सरकार के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद दिये। शुक्रवार को मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार युवती की सेहत की जांच के लिए एम्स में मेडिकल बोर्ड गठित करने को राजी है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने भी कहा कि पहले मेडिकल बोर्ड से युवती की जांच कराई जानी चाहिये उसके बाद ही कोर्ट मामले की मेरिट पर विचार करे। एम्स में मेडिकल बोर्ड गठित करने के सुझाव पर युवती के वकील कोलिन गोन्साल्विस ने कहा कि युवती फिलहाल मुंबई में है और उसकी हालत ऐसी नहीं है कि वह दिल्ली आ सके। पीठ ने भी कहा कि ऐसे मामलों में देरी नहीं होनी चाहिये। कोर्ट ने कहा कि कानून के मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा। अभी मौजूदा हालात पर विचार होगा।

पीठ ने मेडिकल बोर्ड गठन का सुझाव स्वीकार करते हुए महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मुंबई के केईएम अस्पताल में युवती की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करे। मेडिकल बोर्ड शनिवार को युवती की जांच करेगा। युवती को जांच के लिए शनिवार की सुबह 10 बजे मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होना होगा। 25 जुलाई को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी और उसी दिन कोर्ट मामले पर फिर सुनवाई करेगा। इस मामले में याचिकाकर्ता पीडि़ता 26 वर्ष की है और 24 सप्ताह की गर्भवती है। उसका आरोप है कि उसके प्रेमी ने शादी का झांसा देकर उससे दुष्कर्म किया जिससे वह गर्भवती हो गई। बाद में उसने उसे छोड़ कर दूसरी लड़की से शादी कर ली।

युवती का कहना है कि उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण में गंभीर विकृतियां हैं। उसका सिर और दिमाग नहीं है। उसके बचने की उम्मीद नहीं है। यह गर्भ उसके और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है इसलिए वह गर्भपात कराना चाहती है लेकिन कानून 20 सप्ताह बाद गर्भपात की इजाजत नहीं देता। इस कानून के कारण ही डाक्टर ने उसका गर्भपात करने से मना कर दिया है। युवती ने कानून के इस प्रावधान को चुनौती देते हुए कोर्ट से गर्भपात की इजाजत मांगी है। गुरुवार को कोर्ट ने याचिका पर केंद्र व महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

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