लश्कर आतंकी अबू जुंदाल के खिलाफ सजा का ऐलान आज

Aug 02, 2016
लश्कर आतंकी अबू जुंदाल के खिलाफ मकोका अदालत आज सजा का ऐलान करेगी।

मुंबई । महाराष्ट्र के औरंगाबाद में वर्ष 2006 में हथियारों की बरामदगी के मामले में दोषी पाए गए लश्कर से जुड़े आतंकी सैय्यद जैबुद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल और 11 अन्य दोषियों को मकोका अदालत आज सजा सुनाएगी। अदालत ने इन सभी लोगों को गुरुवार को दोषी ठहराया था। सरकारी वकील वैभव बघाडे ने जिंदाल व दो अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा देने का अनुरोध किया है।

अबू जुंदाल पर आरोप हुए थे सिद्ध

मुंबई की मकोका अदालत ने गुरुवार को 2006 के औरंगाबाद हथियार बरामदगी मामले में अबू जुंदाल उर्फ जैबुद्दीन अंसारी सहित 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था। जुंदाल पर 26/11 के आतंकी हमले मामले में भी मुकदमा चल रहा है।
मकोका अदालत के जज एस.एल.अनेकर ने गुरुवार को जैबुद्दीन अंसारी के साथ 11 अन्य आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था तथा 10 लोगों को बरी कर दिया था।

जज ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को माना कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एवं विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया को नुकसान पहुंचाने के लिए इकट्ठा किए गए थे। हथियार जमा करनेवाले गोधरा कांड के बाद हुए गुजरात दंगों के कारण इन नेताओं से नाराज थे। मकोका कोर्ट ने स्वीकार किया कि यह आतंकी हमले की बड़ी साजिश थी, जिसे इन आतंकियों ने जेहाद का नाम दिया।

क्या था मामला ?

औरंगाबाद हथियार जब्ती मामला करीब 10 साल पुराना है। तत्कालीन एटीएस प्रमुख के.पी.रघुवंशी को 8 मई, 2006 को औरंगाबाद में अवैध हथियारों की बड़ी खेप आने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर ही एटीएस टीम ने औरंगाबाद के निकट चांदवड़-मनमाड़ हाईवे पर एक टाटा सूमो एवं इंडिका कार का पीछा करना शुरू किया। टाटा सूमो जल्दी ही एटीएस की पकड़ में आ गई। जिसमें सवार मोहम्मद आमिर शकील अहमद, मोहम्मद जुबेर सैयद अनवर एवं अब्दुल अजीम अब्दुल जमील शेख उर्फ राजा को गिरफ्तार किया गया। लेकिन इंडिका कार पुलिस टीम को चकमा देकर भागने में सफल रही।

इंडिका कार बाद में एटीएस को नासिक के मालेगांव कस्बे में लावारिस मिल थी। एटीएस के अनुसार जैबुद्दीन अंसारी ने इसी कार से मालेगांव तक का सफर किया था। एटीएस को इस मामले में दोनों कारों से 16 ए.के.47 राइफल, 3200 कारतूस, 64 मैग्जीन्स, दर्जनों हैंडग्रेनेड्स एवं 43 किलो आरडीएक्स विस्फोटक मिला था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार ये हथियार किसी हरे रंग के टैंपो में लाकर टाटा सूमो एवं इंडिका में रखे गए थे। हथियार रखे जाते समय अबू जुंदाल के साथ कुछ पाकिस्तानी नागरिक भी थे। इस मामले में में कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर दोष सिद्ध करने के लिए करीब 100 लोगों की गवाहियां दर्ज कीं एवं 2000 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज पेश किए।

कौन है अबू जुंदाल ?

8 मई, 2006 को जैबुद्दीन अंसारी हथियार लदी टाटा इंडिका कार लेकर पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहा। वह यह कार लेकर मालेगांव पहुंचा, जहां हथियार एक सुरक्षित ठिकाने पर छिपाकर कार को लावारिस छोड़ दिया। फिर अलग-अलग रास्तों से वह मुंबई पहुंचा। मुंबई में एक राजनेता के सरकारी आवास में भी वह रुका। मुंबई से भागकर वह बंग्लादेश होते हुए पाकिस्तान पहुंचा। पाकिस्तान में वह लश्कर-ए-तैयबा एवं आईएसआई के लिए काम करने लगा।

इन पाकिस्तानी संगठनों ने ही उसका नाम जैबुद्दीन अंसारी से बदलकर अबू जुंदाल रखा एवं उसका उपयोग भारत भेजे जानेवाले आतंकियों को हिंदी सिखाने के लिए किया। अबू जुंदाल पर आरोप है कि वह 26/11 के हमले के समय कराची स्थित कंट्रोल रूप में मौजूद रहकर भारत में हमलाकर रहे आतंकियों को निर्देश दे रहा था।

जुंदाल को 27 मई, 2013 को सऊदी अरब से डिपोर्ट किया गया है। कुछ समय एनआईए के कब्जे में रहने के बाद मुंबई पुलिस की अपराध शाखा उसे मुंबई ले आई। फिलहाल वह आर्थर रोड जेल में है। उस पर 26/11 हमले के मामले में मुकदमा चलाया जा रहा है। कुछ समय पहले इसी मामले में पाकिस्तानी मूल के अमरीकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज की गई है।

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