इरोम शर्मिला के फैसले को नहीं मिल रहा मणिपुर की जनता का साथ

Aug 12, 2016
इरोम शर्मिला का अनशन खत्म करने का फैसला मणिपुर की जनता को रास नहीं आ रहा है। यहां की जनता ने उनसे मुंह मोड़ लिया है।

इंफाल। सशस्त्र बल विशेषाधिकार नियम (आफस्पा) के खिलाफ 16 साल तक अनशन करने वाली इरोम शर्मिला को दुनियाभर में एक प्रतीक समझा जाता है। लेकिन, अपने गृह राज्य मणिपुर में वो बेहद अकेली हो गई है। इरोम का आफस्पा के खिलाफ अनशन खत्म करने का फैसला और चुनाव लड़ने का ऐलान करने से मणिपुर के लोग नाराज हैं।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, अस्पताल से आने के बाद इरोम जिस जगह रही थी वहां भी उन्हें स्थानीय महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ा। जिसके बाद इरोम को मजबूरन जेएनआईएमएस अस्पताल के उस वॉर्ड में वापस लौटना पड़ा। जहां वो अनशन के समय रह रही थी।

हालांकि कुछ राजनीतिक और सामाजिक लोगों ने इरोम की इस रणनीति का समर्थन किया है। कई लोगों का कहना है कि मणिपुर की जनता इरोम से इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्होंने डेसमंड के साथ शादी करने का फैसला किया है। डेसमंड पर इरोम के आफ्सपा के खिलाफ आंदोलन को अस्थिर करने का आरोप है।

मणिपुर की जनता को लगता है कि इरोम अगर चुनाव लड़कर जीत भी जाती है तो वो आफ्सपा के खिलाफ कुछ नहीं कर पाएंगी। इंफाल के एक नागरिक रतन सैइखोम ने कहा "इरोम शर्मिला के फैसले ने हमारे भरोसे को खत्म कर दिया। इरोम ने अपना वादा तोड़ा है।"

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