चांदनी रात में ताज को नजदीक से देखने की मांग पर नोटिस

Aug 22, 2016
चांदनी रात में ताज को नजदीक से देखने की मांग पर नोटिस
मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर व न्यायमूर्ति सी. नागप्पन की पीठ ने अजय अग्रवाल की अर्जी पर एएसआई और ताज संरक्षण मामले में मुख्य याचिकाकर्ता एमसी मेहता से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ताजमहल को चांदनी रात में और नजदीक से देखने की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर सुप्रीमकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से जवाब मांगा है। अर्जी में प्रत्येक माह की पांच चांदनी रातों में ताजमहल को सेन्ट्रल टैंक से देखने की इजाजत मांगी गई है।

अभी फिलहाल प्रत्येक माह के कुल पांच दिन। पूर्णिमा और उसके दो दिन पहले व दो दिन बाद चांदनी रात में पर्यटकों को ताज देखने की अनुमति मिलती है। ये अनुमति रात 8.30 से 12.15 तक होती है। जिसमें 50-50 के समूह में कुल 400 पर्यटक 300 मीटर की दूरी से ताज देखते हैं।

पढ़ेंः

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर व न्यायमूर्ति सी. नागप्पन की पीठ ने अजय अग्रवाल की अर्जी पर एएसआई और ताज संरक्षण मामले में मुख्य याचिकाकर्ता एमसी मेहता से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। इससे पहले अग्रवाल ने अपनी अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि अभी चांदनी रात में ताजमहल देखने की इजाजत 300 मीटर की दूरी से दी जाती है जो कि बहुत ज्यादा है। उनका कहना था कि ताजमहल में दूरबीन व कैमरा आदि कुछ भी ले जाने की इजाजत नहीं है।

खाली आंखों से 300 मीटर की दूरी से चांदनी रात में ताज की खूबसूरती पूरी तरह नहीं निहारी जा सकती। कोर्ट सेन्ट्रल टैंक से ताज देखने की इजाजत दे दे जो कि मुख्य स्मारक से 150 मीटर की दूरी पर है। शुरूआत में तो मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि 300 मीटर की दूरी बहुत नहीं होती चीजें स्पष्ट दिखाई देती हैं हालांकि बाद में पीठ ने अग्रवाल की अर्जी पर एएसआई और मेहता से दो सप्ताह में जवाब मांगा।

अर्जी में ताजमहल मामले में तत्कालीन कोर्ट कमिश्नर किशन महाजन की 4 जनवरी 2000 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है जिसमें महाजन ने सेन्टर टैंक से ताज देखने की इजाजत दिये जाने की बात कही है। अर्जी में कहा गया है कि 1984 से पहले ताजमहल सुबह छह बजे से रात दस बजे तक खुलता था और पूर्णिमा व उसके एक दिन आगे पीछे कुल तीन दिनों तक चांदनी रात में सुबह चार बजे तक पर्यटकों को ताज देखने की इजाजत थी। इतना ही नहीं पर्यटक मुख्य स्मारक तक भी जा सकते थे।

1984 में एक धमकी के बाद ताजमहल में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। अर्जी में कहा गया है कि ताजमहल की सुरक्षा केन्द्रीय बल सीआइएसएफ के हाथों में है उसकी सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है इसलिए चांदनी रात में ताज को सेंट्रल टैंक से देखने की इजाजत दे दी जाए।

पढ़ेंः

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>