नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए 290 करोड़ का एस्टीमेट बन गया 800 करोड़ का

Jul 04, 2016
पंजाब में रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 290 करोड़ की कीमत की लागत वाली परियोजना के लिए अफसरों द्वारा 800 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया गया।

जालंधर, जेएनएन। जालंधर-चिंतपूर्णी राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण घोटाले में जांच में सनसनीखेज रहस्योद्घाटन हुआ है। कथित तौर पर सत्ता पक्ष के नेताओं व कई रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से पहले लगभग 42 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के लिए 800 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से आपत्ति जाहिर करने के बाद प्रशासन ने इसे सिर्फ 290 करोड़ में तब्दील कर दिया।

मजेदार यह है कि सेंट्रल पीडब्ल्यूडी से आपत्ति पत्र मिलने के महज 24 घंटे के भीतर ही होशियारपुर जिला प्रशासन ने नया एस्टीमेट सौंप दिया था। जाहिर है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से ही प्रशासन की नीयत साफ नहीं थी और योजनाबद्ध तरीके से घपले को अंजाम दिया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक जांच के लिए बनाई गई विजिलेंस एसआइटी ने जब दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया तो घोटाले की कई परतें खुलनी शुरू हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि 10 दिसंबर, 2015 को होशियारपुर के तत्कालीन एसडीएम आनंद सागर शर्मा ने सेंट्रल पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को इस फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए करीब 42 हेक्टेयर (103 एकड़) जमीन अधिग्रहण के एवज में प्रति एकड़ लगभग 20 करोड़ रुपये के हिसाब से 800 करोड़ का एस्टीमेट सौंपा था।

एसडीएम के इस पत्र के जवाब में सेंट्रल पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने 14 जनवरी, 2015 को पत्र के जरिए सूचित किया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जमीन अधिग्रहण के लिए मांगी गई राशि को ‘अत्यधिक’ व ‘आपत्तिजनक’ बताया है और प्रस्तावित प्रोजेक्ट के प्रति अनिच्छा जताई है। मंत्रालय ने जालंधर में पहले अधिगृहीत जमीन के लिए तय कीमत का हवाला देते हुए एसडीएम को कहा कि प्रोजेक्ट संबंधी जमीन का उचित मूल्यांकन कर संशोधित एस्टीमेट भेजा जाए। सेंट्रल पीडब्ल्यूडी से यह पत्र मिलने के ठीक अगले दिन यानी 15 जनवरी, 2016 को ही होशियारपुर प्रशासन की ओर से एसडीएम आनंद सागर शर्मा ने इसी प्रोजेक्ट को 290 करोड़ में तब्दील करते हुए दोबारा सेंट्रल पीडब्ल्यूडी को एस्टीमेट सौंपा।

इसके बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 286 करोड़ रुपये में जमीन अधिग्रहण प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। जांच एजेंसी का मानना है कि प्रोजेक्ट में बिना किसी बदलाव के महज 24 घंटे में 510 करोड़ रुपये कम करना भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

आरटीआइ से हुआ खुला मामला

गौरतलब है कि होशियारपुर के आरटीआइ कार्यकर्ता राजीव वशिष्ठ की ओर से दायर आरटीआइ याचिका से यह बड़ा घोटाला खुला है। आरटीआइ से पता चला कि जालंधर से होशियारपुर तक प्रस्तावित फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए योजनाबद्ध तरीके से क्षेत्र के अकाली नेताओं और कई रसूखदार लोगों ने किसानों की जमीन काफी कम कीमत पर खरीद ली थी। जमीन की कीमत बढ़ाने के लिए बाद में इन्हीं जमीनों पर कॉलोनियां काट दीं और जब अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई तो सरकार को करोड़ों रुपये में बेच दी गई। मीडिया में यह घोटाला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने एसडीएम आनंद सागर शर्मा समेत तहसीलदार बलजिंदर सिंह व नायब तहसीलदार मनजीत सिंह का तबादला करते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए।

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