जानिए, सरकार का वेतन बढोतरी तंत्र कैसे काम करता है? पढ़िए- पूरा गणित

Jun 29, 2016
वेतन आयोग कैसे काम करता है? कैसे तय होता है कि कितनी सैलेरी बढ़नी चाहिए? किन लोगों को मिलेगा 7वें वेतन आयोग का लाभ, जानिए पूरा गणित

नई दिल्ली, [अतुल गुप्ता]। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है। गणित के मुताबिक कर्मचारियों की सैैलरी में करीब 23.6 फीसद का इजाफा होगा। अब आपके दिमाग में कहीं ना कहीं ये सवाल जरूर उठ रहा होगा कि ये आखिर सैलेरी में कितनी बढोतरी होगी और ये ये पैनल कैसे इस बात का निर्णय करता है कि कर्मचारियों की कितनी सैलेरी बढ़नी चाहिए। इन सब पेचिदा सवालों के जवाब दैनिक जागरण आप तक लेकर आ रहा है। हम आपको बताएंगे कि वेतन आयोग कैसे काम करता है और गणित के आधार पर आपकी सैलेरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि वेतन आयोग क्या है?

वेतन आयोग क्या है?

केंद्र सरकार हर दस साल के बाद केंद्रीय कर्माचरियों के सैलेरी स्ट्रक्चर का अवलोकन करने के लिए वेतन आयोग का गठन करती है। सैलेरी स्ट्रक्चर में परिवर्तन के अलावा ये कमेटी के पास टर्म ऑफ रेफरेंस होता है जो उसके मुख्य बिंदुओं को दर्शाता है। इसके अलावा ये कमेटी पेंशन के रूप में दी जाने वाली रकम का भी अवलोकन करती है। 7वें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था और उसने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।

वेतन में बढ़ोतरी का गणित कैसे काम करता है?

वेतन आयोग उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का इस्तेमाल करता है। इस तरीके को वेतन बढ़ाने के लिए साल 1958 से इस्तेमाल में लाया जा रहा है। आयोग भारतीय परिवारों की खपत के आंकड़ों के आधार पर न्यूनतम वेतन का अनुमान लगाता है। इसमें ये आंकड़ा निकाला जाता है कि एक भारतीय परिवार कितनी दाल, दूध, कपड़े औऱ दूसरी वस्तुओं का औसतन इस्तेमाल करता है।

कीमतों में आई वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानि सीपीआई(डब्ल्यू) के द्वारा प्रदर्शित होती है जिससे महंगाई भत्ते की गणना के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

डीए के अलावा मूल भत्ते में बढ़ोतरी, घर का किराया और परिवहन में होने वाले खर्चे को भी इसी के साथ जोड़ा जाता है और फिर जो अंतिम न्यूनतम वेतन आकंड़ा सामने आता है वो केंद्रीय कर्मचारियों को दिया जाता है।

7वें वेतन आयोग ने क्या सिफारिशें की थी?

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वर्तमान ग्रेड को 18वी सीमा तक बढ़ाया जाए ताकि अगर उनकी पदोन्नति नहीं भी होती है तो भी उन्हें पदोनत्ति का लाभ दिया जाए।

आयोग की सिफारिशों के मुताबिक सभी कर्माचरियों की कम से कम तनख्वाह 18000 प्रति महीना होगी जो पहले 7000 रूपये थी। यानि डीए में करीब 90 फीसदी की वृद्धि की गई है। आयोग ने मूल भत्ते में 14.3 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की है। ये महंगाई भत्ते में हुई बढ़ोतरी को हटाकर है।

वेतन आयोग की सिफारिशों में कौन-कौन से कर्मचारी शामिल होंगे?

7वें वेतन आयोग के मुताबिक केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारी, केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाले सिविल सर्विस कर्मचारी और वो लोग जो लोग जिन्हें भारत की संचित निधि से तनख्वाह प्राप्त होती है उन्हें सीधे तौर पर बढ़ी हुई सैलेरी से फायदा पहुंचेगा।

PSU कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

पहले आप ये जान लें कि पीएसयू क्या है? पीएसयू का मतलब होता है पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग यानि ऐसी कंपनियां जो सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और उस कंपनी के ज्यादातर शेयर सरकार के पास होते हैं। पीएसयू कर्मचारियों के पे स्केल अलग होते है और ये इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें काम करने वाले कर्मचारी किन शर्तों के साथ काम कर रहे हैं। पीएसयू कर्मचारियों को अगल तनख्वाह और अलग सुविधाओं के साथ काम पर रखा जाता है। इसलिए उनको 7वें वेतन आयोग से कुछ भी नहीं मिलेगा। ये कहा जा सकता है कि पीएसयू के अंतर्गत आने वाली कंपनियां अपने कर्मचारियों की तनख्वाह अपने स्तर से बढ़ाएं।

केंद्र सरकार के अंतर्गत कितनें कर्मचारी आते हैं?

साल 2014 के रिकॉर्ड के मुताबिक केंद्र सरकार के पास 4.7 मिलियन कर्मचारी हैं जिनमें सबसे ज्यादा 1.3 मिलियन भारतीय रेलवे के पास कर्मचारी हैं। इसके बाद गृह मंत्रालय में 9 लाख 80 हजार और फिर रक्षा मंत्रालय में 3 लाख 98 हजार कर्माचारी हैं।

कितने पेंशनधारकों को मिलेगा लाभ?

1 जनवरी 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक 5.2 मिलियन लोग पेंशनधारक हैं जिनमें सबसे ज्यादा 36 फीसदी भारतीय सेना से रिटायर हुए सैनिक हैं और फिर 25 फीसदी भारतीय रेलवे से रिटायर हुए लोग पेंशन पा रहे हैं।

 

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