विरोध का अनोखा तरीका, पुल बनवाने के लिए नदी तैरने की जिद

Jun 14, 2016
सरकारी उपेक्षा के खिलाफ कई तरीकों द्वारा विरोध दर्ज किया जाता है। केरल का एक छात्र अपने खास अंदाज में विरोध दर्ज करा रहा है।

तिरुअनंतपुरम। अर्जुन संतोष नौवीं कक्षा में पढ़ता है। आम छात्रों की तरह रोजाना स्कूल जाता है। लेकिन वो नदी पार करने के लिए नाव का सहारा नहीं लेता है। बल्कि हर रोज तीन किमी तैरकर अपने स्कूल पहुंचता है। ऐसा नहीं है कि नदी पार करने के लिए उसे नावें नहीं मिलती हैं। उसे एक जिद है कि किसी भी तरह से उसके गांव में सरकार एक अदद पुल बनवा दे।

अल्पुझा के पेरुंबलम गांव के रहने वाले अर्जुन के गांव की आबादी करीब 10 हजार है। गांव के लोग वेम्बानद बैक वाटर को पार करने के लिए पिछले 25 साल से एक पुल बनाने की गुहार सरकार से लगा रहे हैं। लेकिन गांव वालों की आवाज को करीब-करीब सभी सरकारों ने अनसूनी कर दी। सरकारी वादाखिलाफी और उपेक्षा से नाराज अर्जुन ने विरोध में शामिल होने का फैसला किया। उसने स्कूल जाने के लिए अनोखा रास्ता अख्तियार किया।

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अर्जुन ने कहा कि सामान्य तौर पर नावें छोटी होती हैं। उन नावों में क्षमता से ज्यादा लोग सवार होते हैं। जिसकी वजह से हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। अर्जुन ने सरकारी उपेक्षा के खिलाफ एक चिठ्ठी लिखी। लेकिन प्रशासन की तरफ से उसे कहा गया कि वो अपने आपको विरोध-प्रदर्शन से दूर रखे।

मेल टूडे के मुताबिक अल्पुझा की डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर आर गिरिजा ने नोटिस देने के संबंध में कहा कि वो छोटा है, इस सीजन में नदी पार करना खतरनाक है। अगर कुछ उसके साथ बुरा हुआ तो जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। लिहाजा उसे नोटिस भेज कर ऐसा न करने के लिए कहा गया है। अर्जुन का कहना है कि उसने अपने अभियान को बंद करने का फैसला किया है। लेकिन अगर प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वो एक बार फिर विरोधस्वरूप नदी तैरकर अपने स्कूल जाएगा।

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