स्कूल और आंगनबाड़ी को एक ही निगरानी तंत्र में लाने की पहल

Jun 30, 2016
स्कूल और आंगनबाड़ी को एक ही निगरानी तंत्र में लाने की पहल के लिए केंद्र के विभिन्न मंत्रालय अपनी योजनाओं के साथ तालमेल करेंगे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति से ले कर उनके प्रदर्शन और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए तैयार हो रही आइटी आधारित विभिन्न योजनाओं को जल्दी ही एकीकृत कर दिया जाएगा। साथ ही इससे आंगनबाड़ी को भी जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों की ओर से चलाई जा रही इन योजनाओं को साथ लाने के बाद सरकार के लिए बच्चों तक तीन साल की उम्र से स्कूल छोड़ने तक नियमित रूप से पहुंच पाना आसान हो सकेगा।

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, ‘अलग-अलग रूप से विकसित किए जा रहे आइटी आधारित तंत्र को एकीकृत करने की पहल शुरू कर दी गई है। सैद्धांतिक रूप से इस पर कोई मतभेद नहीं है। इससे फायदा यह होगा कि बच्चों के लिए शुरुआत से ही सभी योजनाएं एक साथ समग्र रूप से लागू की जा सकेंगी। आंगनबाड़ी में दी जाने वाली 70 फीसदी सेवाएं वही हैं, जिनकी निगरानी स्वास्थ्य मंत्रालय अपनी अलग व्यवस्था के तहत कर रहा है।’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा महिला और बाल विकास मंत्रालय इसके लिए अपने आइटी आधारित निगरानी तंत्र को ना सिर्फ एक-दूसरे के लिए उपलब्ध करवा देंगे, बल्कि इसे पूरी तरह एकीकृत करने की ओर काम करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि अगले दो साल के दौरान यह मुमकिन हो सकता है।

इस लिहाज से आधार पहचान पत्र बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। साथ ही इससे बच्चों से जुड़ी योजनाओं में भ्रष्टाचार बहुत हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों का श्रम भी बचेगा। इसी तरह योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी यह एकीकरण बहुत मददगार साबित होगा।

अगर एक बच्चा तीन साल की उम्र में आंगनबाड़ी में पहुंचता है, तभी उसके सभी आंकड़े एकीकृत व्यवस्था में दर्ज हो जाएंगे। एक बार व्यवस्था में दर्ज बच्चे के आंकड़े स्कूल और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के लिए भी उपयोग में लाए जा सकेंगे। इसमें कोशिश की जाएगी कि आने वाले कुछ वर्षो के अंदर सभी लाभार्थी के बायोमेट्रिक आंकड़े उपलब्ध हों। यह काम आधार के जरिए बहुत आसानी से हो सकता है।

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