यूएस सीनेट ने नहीं माना भारत है अहम रक्षा साझेदार, भारत ने कहा चिंता की बात नहीं

Jun 17, 2016
भारत को खास रक्षा व रणनीति सहयोगी का दर्जा देने वाले संशोधन विधेयक को अमेरिकी सीनेट की मंजूरी नहीं मिलने को भारत ने खास तवज्जो नहीं दी है।

नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। भारत को खास रक्षा व रणनीति सहयोगी का दर्जा देने वाले संशोधन विधेयक को अमेरिकी सीनेट की मंजूरी नहीं मिलने को भारत ने खास तवज्जो नहीं दी है। भारत ने कहा है कि अमेरिकी सरकार पहले ही भारत को अपना प्रमुख रक्षा सहयोगी घोषित कर चुकी है। वैसे भी इस कानूनी संशोधन का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है और आगे चल कर इसे पारित करवाया जा सकता है।

नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट (एनडीएए) में भारत संबंधी संशोधन का प्रस्ताव वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसद जॉन मैक्केन ने पेश किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि एनडीएए में संशोधन की प्रक्रिया लंबी होती है। अभी जो प्रस्ताव गिरा है वह सिर्फ एक खास संशोधन को लेकर था। लेकिन इसके आधार पर यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि अन्य संशोधनों का क्या भविष्य होगा। वैसे भी एनडीएए में संशोधन का मामला वहां के प्रशासन के स्तर पर उठाये जाने वाले कदमों से अलग होता है।

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अमेरिकी सरकार पहले ही इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि भारत उनका एक अहम रक्षा सहयोगी देश है। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान 07 जून, 2016 को जारी संयुक्त बयान में भी इस बात का जिक्र है। कई सीनेटरों और कांग्रेस के सदस्य इस घोषणा को अमल में लाने के लिए एनडीएए में संशोधन के समर्थन में थे। लेकिन वोटिंग में एक अन्य प्रस्ताव की वजह से यह संशोधन भी पारित नहीं हो सका। भारत सरकार के इस संतुलित बयान के बावजूद माना जा रहा है कि एनडीएए में संशोधन के टल जाने से भारत के लिए अमेरिका से रक्षा से जुड़ी तकनीकी को हासिल करना थोड़ा मुश्किल होगा। इस बारे में पाकिस्तान को एफ16 विमानों की बिक्री संबंधी प्रस्ताव के सीनेट में गिरने का उदाहरण दिया जा सकता है।

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प्रशासन के स्तर पर इस बारे में पाक सरकार के साथ समझौता होने के बावजूद भी इसे लागू नहीं किया जा सका है। पाकिस्तान को अमेरिका से एफ16 विमान खरीदने के लिए अब नये सिरे से कोशिश करनी होगी। जबकि अगर भारत को रक्षा सहयोगी बनाने का यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो इसके बाद अमेरिका से तमाम हथियारों को हासिल करना भारत के लिए आसान होता।

इस संशोधन के पारित होने के बाद भारत के साथ अमेरिका वैसे ही रक्षा समझौता करता जैसा कि वह नाटो के सदस्य देशों के साथ करता है। एक तरह से नाटो देशों के अलावा भारत अमेरिका का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार देश के तौर पर स्थापित होता।वैसे एनडीएए में संशोधन प्रस्ताव के पारित नहीं होने को अमेरिकी सांसद जैन मैक्केन ने खेदजनक बताया है और इसके लिए वहां के सीनेटरों के सुस्त रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि दुख की बात है कि अमेरिकी सांसद राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रख कर वोटिंग नहीं करते। मैक्केन का मूल प्रस्ताव तो सीनेट ने भारी बहुमत से पारित कर दिया था लेकिन उसमें संशोधन के अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित नहीं हो सके।

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