मुंबईः ये लोग छोड़ सकते हैं कांग्रेस पार्टी, कृपाशंकर सिंह का नाम भी शामिल

Jun 30, 2016
कांग्रेस की वर्तमान परिस्थितियों में घुटन महसूस करनेवाले कृपाशंकर अकेले नहीं है। दो और पूर्व उत्तरभारतीय विधायक भी इसी कतार में शामिल हो सकते हैं।

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई: कांग्रेस के दिग्गज नेता गुरुदास कामत भले ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर 15 दिन के अंदर ही इस्तीफा वापस ले चुके हों, लेकिन मुंबई कांग्रेस के कई बड़े नेता जल्दी ही कांग्रेस को अलविदा कहने का मन बना रहे हैं।
मुंबई में अगले साल की शुरुआत में ही मुंबई महानगरपालिका के चुनाव होने हैं। उससे पहले मुंबई कांग्रेस का पुनर्गठन लगभग पूरा हो चुका है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम की टीम में कांग्रेस के अन्य नेताओं के समर्थकों का लगभग सफाया हो गया है। इसके कारण असंतोष चरम पर है।

निरुपम विरोधी गुट को इस स्थिति में जल्दी कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं दिख रही। न ही कांग्रेस की हालत में सुधार का कोई संकेत मिल रहा है। इसलिए कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस को अलविदा कह सत्तारूढ़ भाजपा का रुख कर सकते हैं। इनमें एक प्रमुख नाम गांधी परिवार के वफादार माने जानेवाले कृपाशंकर सिंह का भी हो सकता है। सिंह मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष एवं राज्य गृहराज्यमंत्री रह चुके हैं।

भाजपा भी उनपर डोरे डालकर मुंबई के उत्तरभारतियों के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। मुंबई मनपा की सत्ता से शिवसेना को बेदखल करने के लिए वह यह कदम उठाना चाहती है। पूर्वोत्तर मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष मनोज दुबे एवं वरिष्ठ नेता किशोर जोशी पहले ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में जा चुके हैं।

हालांकि कृपाशंकर सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने की बात अभी स्वीकार नहीं करते। लेकिन मुंबई कांग्रेस में चल रही गतिविधियों को लेकर अपना असंतोष छिपाते भी नहीं। वह कहते हैं कि जिस ढंग से मुंबई कांग्रेस का कामकाज चल रहा है, वह पार्टी के लिए हितकर नहीं है। हाल के एक निर्णय के अनुसार भविष्य में कार्पोरेशन का टिकट उसे ही दिए जाने की बात हो रही है, जो अपने वार्ड में सर्वाधिक सदस्य बना लेगा।

सिंह कहते हैं कि इस पद्धति से जैसे युवक कांग्रेस का बंटाधार हो गया, वैसे ही मुंबई कांग्रेस का भी हो जाएगा। सिंह ने पिछले दिनों दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम माथुर से भी मुलाकात हो चुकी है।

लेकिन वह इन मुलाकातों को निजी मुलाकात बताते हुए कहते हैं कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं आई है कि कोई निर्णय किया जा सके। कांग्रेस की वर्तमान परिस्थितियों में घुटन महसूस करनेवाले कृपाशंकर अकेले नहीं है। दो और पूर्व उत्तरभारतीय विधायक भी इसी कतार में शामिल हो सकते हैं। दो दिन पहले ही कांग्रेस की ओर से दी गई इफ्तार पार्टी में कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति भी इसी असंतोष का संकेत बताई जाती है।

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