पिछले वर्ष दिसंबर में ही गिराया जाना था सावित्री नदी पर बने महाड पुल

Aug 10, 2016
महाड पुल की मियाद पिछले साल दिसंबर में ही खत्म हो चुकी थी और उसे तोड़ना था लेकिन जनता की मांग पर इसे चालू रखा गया था।

मुंबई, प्रेट्र: सावित्री नदी पर बने ब्रिटिश कालीन महाड पुल की मियाद खत्म हो चुकी थी। इसे पिछले साल दिसंबर में ही ध्वस्त किया जाना था, लेकिन जनता की मांग पर चालू रखा गया। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मुंबई-गोवा राजमार्ग पर बना यह पुल गत दो अगस्त को ढह गया था। इसके कारण राज्य परिवहन निगम की दो बसें और कुछ अन्य वाहन नदी में समा गए थे। अब तक 26 शवों को निकाला जा चुका हालांकि 14 अब भी लापता हैं। सूबे के लोक निर्माण मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि जनता की मांग पर ही पुल को चालू रखा गया था।

मुंबई-गोवा हाईवे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के क्षेत्र में आता है। महाड हादसे के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की थी कि 18 महीने के भीतर पुल का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।

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अन्य प्रश्नों के जवाब में पाटिल ने कहा, प्रदेश में 2,300 पुल हैं। इनमें 100 से अधिक ब्रिटिश राज और छत्रपति शिवाजी महाराज के समय के हैं। सभी पुलों का साल में दो बार निरीक्षण होता है। आइआइटी के विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय समिति ने पुल हादसे की जांच शुरू की है। आगामी 23 अगस्त को अगली कैबिनेट बैठक होनी है। तब तक उनकी रिपोर्ट आने की उम्मीद है। हादसे की न्यायिक जांच शुरू करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

मगरमच्छों के बावजूद चल रहा सर्च ऑपरेशन

सावित्री नदी में बहुत अधिक पानी और मगरमच्छों के होने के बावजूद बचाव कर्मियों ने बुधवार को राहत कार्य जारी रखने का साहस दिखाया। सर्च टीमों ने फैसला किया है कि जब तक सभी शव और बह गए वाहन बरामद नहीं होते, तब तक अभियान जारी रखा जाएगा।

रायगढ़ के रेजीडेंशियल डिप्टी कलेक्टर सतीश बगल ने बताया, ‘तलाशी अभियान पहले की तरह चल रहा है। इसमें एनडीआरएफ, नौसेना, तटरक्षक बल और स्थानीय गोताखोर जुटे हुए हैं।’

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