संसदीय बोर्ड की बैठक में कल हो सकती है गुजरात के नए मुख्यमंत्री पर चर्चा

Aug 02, 2016
गुजरात के नए मुख्‍यमंत्री के नाम को लेकर कल या फिर गुरुवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला लिया जा सकता है। हालांकि भाजपा इसको लेकर काफी सावधानी बरत रही है।

नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के स्थान पर नए मुख्यमंत्री के चुनाव के पहले भाजपा हर कदम फूंक फूंक कर रख रही है। ऐसे चेहरे की तलाश है जो लंबी पारी का घोड़ा साबित हो सके। यानी 2017 के बाद भी जिसे गुजरात की कमान सौंपकर निश्चिंत रहा जा सके। संभवत: बुधवार या गुरुवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में नया नाम तय किया जा सकता है। उससे पहले प्रदेश प्रभारी को राज्य में जाकर विधायकों व नेताओं से चर्चा करने को कहा गया है।

इससेे पहले फिलहाल अटकलों का बाजार गर्म है। कयास हर नाम का लगाया जा रहा है और उसमें खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी संभावित मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है। वह मजबूत भी हैं, प्रधानमंत्री के विश्वस्त भी और लंबी पारी खेलने के लिए उपयुक्त भी। लेकिन वर्तमान स्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका सटीक विकल्प ढूंढना बहुत मुश्किल है। खासकर 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी शाह को राष्ट्रीय राजनीति में ही रखना चाहेंगे। ऐसे में बाकी के नाम गुजरात से ही ढूंढे जा रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि मोदी युवा और विश्वसनीय चेहरा चाहते हैं। इसी क्रम में नितिन पटेल और विजय रूपाणी से लेकर गणपत भाई वसावा और भीखू भाई दलसाणिया तक का नाम चर्चा में है। मंगलवार को संसद परिसर मे भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओ के बीच मशविरा का दौर चलता रहा। एक महीने पहले ही मोदी कैबिनेट में आए गुजरात के वरिष्ठ नेता पुरुषोत्तम रूपाला ने भी प्रधानमंत्री और अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा के हर नेता की नजर अब इस पर है कि शाह संसदीय बोर्ड की बैठक कब बुलाते हैं। संभावना जताई जा रही है कि बुधवार को बैठक हो सकती है।

दरअसल भाजपा भी लंबे समय तक अटकलों के बाजार को गर्म नहीं छोड़ना चाहती है। इससे गुजरात मे भी खेमेबाजी शुरू होने का डर है। लिहाजा भाजपा के एक नेता ने इतना जरूर कहा कि फैसला जल्द होगा। प्रदेश से जुड़े एक नेता का मानना था कि आनंदीबेन के हटने के बाद किसी पटेल के हाथ सत्ता जाने की संभावना थोड़ी कम है। अगर ऐसा हुआ तो नितिन पटेल के लिए रास्ता मुश्किल होगा। जबकि जैन समुदाय से आने वाले रूपाणी को सबसे आगे माना जा जा रहा है। आदिवासी समुदाय से आने वाले वसावा को इसलिए दावेदार माना जा रहा है क्योंकि राज्य में आदिवासी संख्या अच्छी है। तकरीबन 20-25 सीटों पर उनका प्रभाव माना जाता है।

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