दिमागी बुखार के मरीजों की सूचना सरकार को देनी होगी

Aug 12, 2016
सरकार के इस फैसले के बाद अस्पतालों को दिमागी बुखार के मरीजों की जानकारी सरकार के पास भेजनी होगी।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार जापानी इंसेफेलाइटिस को अधिसूचित बीमारियों की श्रेणी में शामिल करने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को संसद में इसकी घोषणा की। सरकार के इस फैसले के बाद अस्पतालों को दिमागी बुखार के मरीजों की जानकारी सरकार के पास भेजनी होगी।

लोकसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए नड्डा ने यह घोषणा की। भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस के प्रकोप का मुद्दा उठाने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था। जापानी इंसेफेलाइटिस को दिमागी बुखार भी कहते हैं। यह ज्यादातर बच्चों को अपनी चपेट में लेता है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार के कई जिलों में इस बीमारी का कहर छाया हुआ है। नड्डा ने कहा कि पुणे के राष्ट्रीय विषाणु संस्थान की गोरखपुर स्थित शाखा को क्षेत्रीय केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

आदित्यनाथ ने कहा कि इस साल गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 125 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। यह सिलसिला 1978 से जारी है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के दल जिले का दौरा कर रहे हैं, लेकिन इससे कुछ मदद नहीं मिली है। मासूम बच्चे बेमौत मर रहे हैं और यह पूरा क्षेत्र प्रयोगशाला बनकर रह गया है। इस बीमारी को काबू करने में नाकामी साफ दिखाई देती है।

इसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी मदद मुहैया करा रही है। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास इस साल भी 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च के बगैर पड़े हैं। यह राशि राज्य को विषाणु-जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए दी गई थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र की मदद के बावजूद उत्तर प्रदेश में 20 आइसीयू में से 10 पीडियाट्रिक्स आइसीयू अब तक बने हैं। इसके अलावा राज्य में चिकित्सकों के बहुत से पद भी खाली पड़े हैं।

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