नई विमानन नीति घोषित, 2500 रुपये में भर सकेंगे छोटे व मझोले शहरों की उड़ान

Jun 15, 2016
केंद्र सरकार ने देश में नई विमानन नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति में 5/20 नियम को बदलने के साथ ही किराये को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बहुप्रतीक्षित नागरिक विमानन नीति को मंजूरी देते हुए सरकार ने अंतत: विवादास्पद 5/20 नियम को आंशिक रूप से समाप्त कर दिया है। अब नई एयरलाइनों को इंटरनेशनल उड़ानों के लिए पांच साल तक डोमेस्टिक उड़ानों की शर्त का पालन नहीं करना पड़ेगा। लेकिन कम से कम बीस विमान अथवा बीस फीसद डोमेस्टिक उड़ानों की शर्त से छूट नहीं दी गई है।

नीति में एयरलाइनों व एयरपोर्ट आपरेटरों को करों में राहत देकर छोटे व मझोले शहरों तक हवाई यातायात सुविधा पहुंचाने तथा एक घंटे की विमान यात्रा के लिए अधिकतम 2500 रुपये अथवा आधे घंटे के लिए 1250 रुपये किराया वसूलने पर जोर दिया गया है। इसके लिए मेट्रो शहरों के बीच उड़ान भरने वालों से रीजनल कनेक्टिविटी सेस वसूला जाएगा। नागरिक विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू तथा राज्यमंत्री डा. महेश शर्मा की मौजूदगी में विमानन सचिव राजीव नयन चौबे ने कैबिनेट से मंजूरी के बाद विमानन नीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा नीति के जरिए सरकार राज्यों, एयरलाइनों व एयरपोर्ट आपरेटरों के सहयोग से आम लोगों को सस्ती विमान सेवाएं मुहैया कराना चाहती है।

ऐसा टियर-1 व टियर-2 नगरों के एयरपोर्ट पर एटीएफ पर वैट की दर एक फीसद, उत्पाद शुल्क की दर डेढ़ फीसद होने तथा एयरपोर्ट शुल्क, पार्किंग शुल्क आदि माफ होने से संभव होगा। देश में 350 निष्क्रिय या कम सक्रिय हवाई अड्डों/पट्टियों के विकास तथा नई एयरलाइनों को प्रोत्साहन देने के लिए जल्द ही नए प्रोत्साहनों का एलान किया जाएगा। नीति में एयरपोर्ट अथारिटी को नुकसान से बचाने के लिए एएआइ के एयरपोर्ट से डेढ़ सौ किमी के भीतर दूसरा एयरपोर्ट बनाए जाने पर उसे मुआवजा देने का प्रावधान है। वैट आदि में कमी का फैसला राज्य सरकारों को लेना होगा। लिहाजा अब यात्रियों को सस्ती हवाई यात्रा की सुविधा देने की काफी हद तक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर भी आएगी।

इसमें हेलीकाप्टर सेवाओं, एमआरओ और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं को बढ़ावा देने के उपाय भी किए गए हैं। इसके नियम भी घोषित किए जाएंगे। निषिद्ध क्षेत्र से बाहर 5000 फीट तक ऊंचाई की हेलीकाप्टर उड़ानों के लिए एटीसी की अनुमति जरूरी नहीं होगी। जबकि द्विपक्षीय अधिकारों (बायलैटरल राइट्स) पर अंतिम फैसला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। चौबे ने कहा कि एमआरओ सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्यों से इन सेवाओं को वैट से मुक्त रखने को कहा जाएगा। इन सेवाओं पर पांच वर्ष तक एयरपोर्ट रायल्टी जैसे अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाए जाएंगे। ग्राउंड हैंडलिंग पालिसी को भी बदला जा रहा है। अब हर एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की एजेंसी समेत कम से कम तीन ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां होंगी।

घरेलू शिड्यूल्ड एयरलाइनों को अपनी खुद की एजेंसी रखने की छूट मिलेगी।रूट डिस्पर्सल गाइडलाइंस को भी युक्तिसंगत बनाया गया है। अब उन्हीं रूटों को श्रेणी-1 माना जाएगा जिनकी लंबाई 700 किमी तथा जिन पर 70 फीसद औसत सीट फैक्टर के साथ सालाना पांच लाख यात्री उड़ते हों। रीजनल कनेक्टिविटी के लिए श्रेणी-3 रूटों की लंबाई, सीट फैक्टर व यात्री संख्या में कमी की जाएगी। प्रमुख एयरपोर्ट का भी नया वर्गीकरण किया गया है जिससे आठ नए एयरपोर्ट प्रमुख हो गए हैं, जबकि दो पुराने हट गए हैं।दक्षेस देशों तथा भारत से 5000 किमी दायरे से बाहर के देशों के लिए पारस्परिक आधार पर ओपन स्काई नीति लागू होगी। यानी ऐसे देश भारत के लिए और भारत से मनचाही उड़ाने भर सकेंगे, बशर्ते वे यही अधिकार भारत को भी दें।

उन विदेशी एयरलाइनों को अतिरिक्ति बायलैटरल राइट्स देने पर विचार किया जाएगा, जिन्होंने भारत के लिए अपने सौ फीसद बाइलैटरल राइट्स का प्रयोग कर लिया है, परंतु जिन देशों के लिए भारतीय एयरलाइनों ने अपने 80 फीसद द्विपक्षीय अधिकार इस्तेमाल नहीं किए हैं।चौबे के अनुसार ‘नीति का मकसद एविएशन क्षेत्र में ‘ईज आफ डुइंग बिजनेस’ व स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के अलावा पांच साल में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या को मौजूदा आठ करोड़ से बढ़ाकर 30 करोड़ पर पहुंचाना है।

यह होंगे फायदे

रिपोर्ट्स के अनुसार नई नीति में विमानन कंपनियों के लिए अब तक जरूरी 5/20 नियम को बदल दिया गया है और इसकी जगह 0/20 नियम लेगा। अब विमानन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 20 विमानों की जरूरत होगी लेकिन अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू करने के लिए पांच साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खबर है कि नई एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत आपको 1 घंटे के सफर के लिए 2500 रुपये का किराया देना होगा वहीं 30 मिनट के लिए आपको इसके अंतर्गत 1200 रुपये का हवाई किराया देना होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार नई नीति के लागू होने के बाद अब यात्रियों को टिकट कैंसिल कराने पर रिफंड महज पंद्रह दिनों के अंदर मिल जाएगा। यह भी प्रस्ताव था कि अगर कोई यात्री अपना टिकट कैंसल करवाता है तो कंपनी कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर यात्री से 200 रुपए से ज्यादा नहीं वसूल सकती। नई पॉलिसी में यह भी प्रस्ताव है कि एविएशन कंपनी अगर कोई फ्लाइट रद्द करती है तो उसे इसकी सूचना ग्राहकों को 2 महीने पहले देनी होगी और पूरा रिफंड भी करना होगा। टिकट कैंसल करने के मामले में घरेलू हवाई यात्रा के लिए रिफंड 15 दिन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के मामले में 30 दिनों के भीतर रिफंड देना होगा। विमान में यात्रा के दौरान यात्रियों को अपने साथ अब 15 किलो तक का सामान ले जाने की छूट होगी साथ ही उसके उपर हर एक किलो पर 100 रुपए देने होंगे। इससे पहले कंपनियां हर एक किलो पर 300 रूपए वसूलती थीं। विमान में ओवर बुकिंग होने पर अगर यात्री को सवार नहीं होने दिया जाता है तो उसकी मुआवजा राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दी गई है।

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