गांवों के टॉयलेट में बल्ब जलाने के लिए पेशाबघरों से बनेगी बिजली

May 23, 2016

उदयपुर। मानें या न मानें, लेकिन यह सच है। झीलों की नगरी उदयपुर में बिजली बनाने का अनूठा तरीका अपनाया जा रहा है। जल्द ही यहां के पेशाबघरों से बिजली बनेगी। इसके लिए यूरिनट्रिसिटी तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।

ब्रिटेन स्थित एक गैर सरकारी संगठन की पहल पर यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंग्लैंड, ब्रिस्टल और वेल्स के अनुसंधानकर्ताओं की संयुक्त टीम इस पर काम कर रही है।

इसके लिए जल्द ही शहर में एक यूरिनल प्लांट लगाया जाएगा। भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत इस कवायद को अंजाम दिया जा रहा है।

अनुसंधानकर्ताओं ने उदयपुर के आसपास के गांवों को दौरा किया है, ताकिप्लांट लगाने के लिए सही स्थान मिल सके। वैज्ञानिकों की यह टीम जिला परिषद के सदस्यों से मिल रही है और संतोषप्रद तरीके से आगे बढ़ रही है।

तकनीक और इसके उपयोग

इसके लिए यूरिन बायो-फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे निकलने वाली बिजली से मोबाइल और अन्य उपकरण चार्ज किए जा सकते हैं। प्रोजेक्ट में भागीदार वेल्स ऑफ इंडिया कंट्री के डायरेक्टर ओपी शर्मा के मुताबिक, इससे बनने वाली बिजली से गावों में टॉयलेट-बाथरूम के बल्ब चलाए जा सकेंगे। यूरिन से बिजली बनाने की कल्पना प्रोफेसर लोआनिस लेरोपोलस की है, जिन्होंने माइक्रोबायल फ्यूल सेल बनाई हैं।

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