मिस्त्र बनेगा भारतीय हथियारों का खरीदार!

Sep 02, 2016
मिस्त्र बनेगा भारतीय हथियारों का खरीदार!
मोदी और अल-सिसी की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनो नेताओं ने आंतकवाद को दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर स्वीकार किया है।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। वर्ष 2013 में अब्दुल फतेह अल-सिसी मिस्त्र के बतौर रक्षा मंत्री भारत की यात्रा पर आये थे और उन्होंने तब भारत से रक्षा सहयोग को मजबूत करने और भारत से कई तरह के हथियारों की खरीद की इच्छा जताई थी। अल-सिसी अब मिस्त्र के राष्ट्रपति हैं और गुरुवार को दिल्ली में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ जब द्विपक्षीय वार्ता की तो उनकी बातचीत में रक्षा सहयोग का मुद्दा सबसे अहम रहा। दुनिया में तेजी से बढ़ते हथियारों के बाजार में अपना हिस्सा तलाश रहा भारत भी मिस्त्र को अपने मिसाइलों और युद्धक विमानों के संभावित खरीदार देश के तौर पर देख रहा है।

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वैसे दोनों नेताओं के बीच आतंक के खिलाफ आपसी सहयोग बढ़ाने की भी सहमति बनी है। मोदी और अल-सिसी की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनो नेताओं ने आंतकवाद को दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर स्वीकार किया है। भारत व मिस्त्र दोनो बढ़ते धार्मिक कट्टरता, हिंसा और आतंकवादी घटनाओं से पीडि़त हैं। अपने भाषण में पीएम मोदी ने इस बात को स्वीकार भी किया है। मोदी ने कहा है कि अब दोनो देश आपसी रिश्तों को प्रगाढ़ करने के लिए लक्ष्य आधारित कार्ययोजना के तहत काम करेंगे। चाहे आतंकरोधी सहयोग से जुड़े कार्यक्रम हो या व्यापार व निवेश को बढ़ाने की योजना हो, हर क्षेत्र में अब लक्ष्य तय होंगे और उसी हासिल करने के लिए समयबद्ध कदम उठाये जाएंगे।

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सूत्रों के मुताबिक भारत और मिस्त्र में रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर काफी समय से बात हो रही है लेकिन अभी तक जमीनी तौर पर कोई प्रगति नहीं हुई है। हालांकि भारत मिस्त्र के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। मिस्त्र की तरफ से भी प्रयास हो रहे हैं लेकिन आतंरिक उथल पुथल की वजह से वहां की सरकार का पूरा समर्थन अभी तक नहीं मिल पा रहा था। लेकिन अल-सिसी ने भारत की यात्रा कर अब बदले माहौल का संकेत दिया है। अब यह तय हो गया है कि रक्षा सहयोग और आतंक के खिलाफ सहयोग भारत व मिस्त्र के आपसी रिश्तों के दो अभिन्न स्तंभ होंगे। रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत व मिस्त्र ने संयुक्त रक्षा समिति भी गठित की है। इसकी पिछली बैठक जनवरी, 2016 में हुई है। रक्षा सहयोग की शुरुआत फिलहाल सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त सैन्य अभियान से होगी लेकिन इसे जल्द ही हथियारों की आपूर्ति में भी तब्दील किया जाएगा। जानकारों की मानें तो भारत कई तरह के हथियार, प्रशिक्षण में इस्तेमाल आने वाले विमान आदि की बिक्री मिस्त्र को कर सकता है। पिछले दिनों भारत के रक्षा प्रदर्शनी में मिस्त्र के एक बड़े दल ने हिस्सा लिया था।

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