एमपी: जजों को चांदी के बर्तनों में खिलाया खाना, बांटे लाखों के गिफ्ट

Jun 20, 2016
एमपी में एक कार्यक्रम में वीवीआईपी मेहमानों और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित कई जजों को चांदी के बर्तनों में खाना परोसने के साथ ही उपहार बांटे गए थे।

नई दुनिया ब्यूरो, (भोपाल)। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया टीएस ठाकुर सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और उनकी पत्नियों को शाही अंदाज में चांदी के बर्तनों में लजीज भोजन कराने पर आरटीआइ कार्यकर्ता अजय दुबे ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। दुबे के अनुसार, ‘रिट्रीट ऑफ जजेस’ कार्यक्रम में शामिल अतिथियों को राज्य सरकार ने राज्य अतिथि का दर्जा देते हुए कीमती गिफ्ट भी बांटे थे। इस पर सरकार ने करीब सात लाख रुपये खर्च कर दिए।

आरटीआइ कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि उन्हें यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मिली। दस्तावेज दिखाते हुए उन्होंने सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया। कहा कि भोज पर किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन जजों को गिफ्ट देना सुप्रीम कोर्ट के कंडक्ट के विरुद्ध है। राज्य में सूखे के कारण किसान दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में चांदी के बर्तनों में भोजन कराना सामंती मानसिकता को दर्शाता है। नेशनल ज्यूडीशियल अकादमी में 14 से 17 अप्रैल तक ‘रिट्रीट ऑफ जजेस’ कार्यक्रम आयोजित था। जिसका औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया था। कार्यक्रम में 240 अति विशिष्ट अतिथि शामिल हुए थे। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी जजों के सम्मान में भोज दिया था।

भोज के लिए सरकार ने भोजन से ज्यादा चांदी के बर्तनों का किराया (3.57 लाख रुपये) दिया, जबकि भोजन पर 3.37 लाख रुपये ही खर्च हुए। उन्होंने बताया कि सरकार ने जजों के चाय-बिस्किट और गिफ्ट पर तीन लाख 17 हजार 270 रुपये खर्च किए हैं। दुबे बताते हैं कि आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों की व्यवस्था मप्र टूरिज्म बोर्ड करता है, लेकिन इस कार्यक्रम के लिए कोटेशन मंगाकर इंदौर के कैटरर को भोजन का टेंडर दिया गया था। उन्होंने बताया कि यह जानकारी जब ज्यूडीशियल अकादमी से मांगी गई तो अकादमी ने पलटकर सवाल पूछा कि आदर-सत्कार क्या होता है, पहले यह बताएं, फिर जानकारी देंगे।

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