सीजेआइ आफिस के आरटीआई दायरे में होने पर संविधान पीठ करेगी विचार

Aug 17, 2016
सुप्रीमकोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ में मामला विचार के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेज दिया गया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर आरटीआई के दायरे में आएगा या नहीं। न्यायाधीशों के स्थानांतरण और नियुक्तियों की जानकारी सूचना कानून (आरटीआइ) के तहत मांगी जा सकती है कि नहीं। इन सभी पहलुओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ विचार करेगी।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पीसी पंत व न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की पीठ ने बुधवार को ये मामला पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेज दिया। सुनवाई के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल के वकील प्रशांत भूषण ने एक बड़ी पीठ के फैसले का हवाला दिया। जिसके बाद पीठ ने कहा कि वे इस मामले को विचार के लिए संविधानपीठ को भेज रहे हैं।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के सूचना विभाग ने मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को आरटीआइ के दायरे में बताने वाले दिल्ली हाईकोर्ट और न्यायाधीशों के स्थानांतरण और नियुक्ति का ब्योरा आरटीआई में बताने के सीआईसी के फैसले के खिलाफ अपने ही यहां यानी सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल कर रखी है। इन अपीलों पर सुनवाई करते हुए शुरू में ही कोर्ट ने हाईकोर्ट और सीआईसी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

सुप्रीमकोर्ट में ये अपीलें 2010 से लंबित हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने 12 जनवरी 2010 को दिये गये फैसले में कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर सूचना कानून के दायरे में आता है। हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों की संपत्ति के ब्योरे से संबंधित सूचना देने का निर्देश दिया था। दूसरी अपील में सुप्रीमकोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित ब्योरा सार्वजनिक करने के केन्द्रीय सूचना आयोग के फैसले को चुनौती दी है।

संविधान में न्यायपालिका और न्यायाधीशों को विशेष दर्जा मिला हुआ है। यह जनता में बहस का मुददा नहीं हो सकता। इससे न सिर्फ न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित होगी बल्कि न्यायाधीश भी प्रभावित होंगे और वे बेवजह अपमानित होंगे। हाईकोर्ट का यह कहना कि सुप्रीमकोर्ट का 1997 का प्रस्ताव कानूनन बाध्यकारी है सही नही है।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट रिस्यूलूशन को अतिरिक्त न्यायिक मान्यता दी है जो कि नहीं दी जा सकती। सुप्रीमकोर्ट का वह प्रस्ताव स्वैच्छिक था और नैतिक आधार पर था। अपील में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश के पास ऐसी महत्वपूर्ण गोपनीय सूचनायें होती हैं जिसका खुलासा नहीं किया जा सकता। न्यायाधीशों के स्थानांतरण नियुक्तियों के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों से उनका नजरिया पूछा था।

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