चीन की कुटिल चाल, सियोल एजेंडा में भारत की NSG सदस्यता शामिल नहीं

Jun 20, 2016
NSG में भारत की सदस्यता पर चीन कुटिल चाल चल रहा है। एक तरफ उसे सदस्यता पर ऐतराज नहीं है। वहीं दूसरी तरफ प्रक्रियाओं का हवाला भी दे रहा है।

नई दिल्ली। एनएसजी में भारत की सदस्यता पर 24 जून को होने वाली सियोल बैठक महत्वपूर्ण है। मीटिंग से पहले रूस ने भरोसा दिया कि वो भारत के दावे का समर्थन करेगी। लेकिन चीन का कहना है कि सियोल बैठक में एनएसजी में भारत की सदस्यता का मामला एजेंडे में शामिल ही नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चिनयिंग का कहना है कि गैर एनपीटी सदस्यों का मामला एनपीटी मीटिंग का एजेंडा कभी रहा ही नहीं है। लिहाजा सियोल में इस भारत की दावेदारी पर चर्चा करने का मतलब ही नहीं है। एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन को ऐतराज नहीं है। लेकिन प्रक्रियाओं का कम से कम पालन तो होना चाहिए।

इस मसले पर चीन का समर्थन हासिल करने के लिए विदेश सचिव एस जयशंकर ने 16 और 17 जून को बीजिंग की यात्रा की थी। चीन दौरे के बाद विदेश सचिव ने कहा कि बीजिंग के साथ सकारात्मक बातचीत जारी है। इस मुद्दे पर चीन के रुख में बदलाव आया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि एनएसजी में भारत की सदस्यता अब महज एक औपचारिकता है। लेकिव चीन के इस बयान के बाद भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। स्वराज ने कहा था कि इस साल के मध्य तक भारत एनएसजी का सदस्य बन जाएगा।

48 सदस्यों वाली एनएसजी में चीन, भारत विरोधी गुट की अगुवाई कर रहा है। चीन के साथ-साथ तुर्की,आयरलैंड और ऑस्ट्रिया ने विरोध दर्ज कराया है। तुर्की की मांग है कि भारत के साथ-साथ चीन को भी एनएसजी की सदस्यता प्रदान की जाए। चीन का कहना है कि ये पूरा मुद्दा तकनीकी तौर पर जुड़ा है। भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है। लिहाजा उसे एनएसजी की सदस्यता कैसे प्रदान की जा सकती है।

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