जानिए, अलगाववादियों पर सालाना इतने करोड़ रुपये किस तरह खर्च करती है सरकार

Sep 07, 2016
जानिए, अलगाववादियों पर सालाना इतने करोड़ रुपये किस तरह खर्च करती है सरकार
केंद्र सरकार अब अलगाववादी नेताओं को दी जा रही कई सुविधाओं को ख़त्म करने का मन बना रही हैं।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर गए सर्वदलीय प्रतिनिधनिमंडल से मिलने से इंकार करने वाले अलगाववादियों को मंहगा पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, वहीं रणनीतिक तौर पर इसे केंद्र के लिए फायदे के तौर पर देखा जा रहा है। घाटी गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने जहां प्रमुख सामाजिक संगठनों और नेताओं से मुलाकात की वहीं अलगाववादियों ने उनसे मुलाकात का ऑफर ठुकरा दिया।

वहीं जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी अलगावावादियों को कड़े हाथों लेते हुए कहा कि मैंने अलगावावादियों को पत्र लिखकर कहा कि देश के तजुर्बेकार लोग घाटी में हैं और बात करना चाहते हैं, हमारे पास यह कश्मीर मुद्दे को सुलझाने का एक अवसर था।

खबरों की माने तो सरकार अब अलगाववादी नेताओं को दी जा रही कई सुविधाओं को ख़त्म कर सकती है। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले इन अलगाववादियों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा फिलहाल कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, जो इस प्रकार हैं-

अलगाववादियों को मिलने वाली हवाई टिकट, कश्मीर से बाहर जाने पर होटल और गाड़ियों जैसी सुविधाएं वापस ली जा सकती है। इन सुविधाओं पर सरकार 100 करोड़ रुपये से अधिक सालाना खर्च करती है। सरकार के पैसे से अलगाववादी फाइव स्टार होटलों में ठहरते हैं और सरकारी गाडि़यों में घूमते हैं। यदि अलगाववादी बीमार हो जाएं तो उनका देश विदेश में इलाज का खर्च भी सरकार उठाती है। फिलहाल अलगाववादियों की सिक्योरिटी में 900 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार के सूत्रों के मुताबिक अलगाववादियों पर हो रहे खर्च का कुछ हिस्सा केंद्र उठाता जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार कुल खर्च का लगभग दस प्रतिशत उठाती है। सूत्रों के अनुसार पिछले छह सालों में अलगाववादियों पर केंद्र और राज्य सरकार लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 2010 से 2015 तक कश्मीर में अलगाववादियों के घर की सुरक्षा के लिए 18 हज़ार पुलिसकर्मियों को बतौर गार्ड तैनात किया गया था। इन सुरक्षाकर्मियों की सैलरी पर राज्य सरकार ने 309 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा अलगाववादियों के पीएसओ पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस पांच वर्षों के दौरान अलगाववादियों की गाडि़यों में इस्तेमाल होने वाले तेल का खर्च 26 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च किया गया।

सरकार ने भले ही अलगाववादियों से मुलाकात न की हो लेकिने साथ गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को सरकार ने साफ कर दिया था कि कोई शख्स या पार्टी को अलगाववादियों से मुलाकात करने में उसे कोई गुरेज नहीं हैं, क्योंकि सरकार चाहती थी कि अलगाववादियों का असल चेहरा सामने आ सके। और हुआ भी वहीं, अलगाववादियों ने उनसे मिलने गए नेताओं से मिलने से मना कर दिया। इससे घाटी के लोगों में बहुत हद तक यह मैसेज चला गया कि अलगाववादी इस समस्या का हल नहीं होने देना चाहते हैं।

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