पेन ड्राइव के फेर में उलझी सीबीआइ, नहीं पेश कर पा रही स्टेटस रिपोर्ट

Jun 21, 2016
व्यापम घोटाला मामले की जांच कर रही सीबीआई उलझन में फंसी है, जिसके चलते वह न तो आगे बढ़ पा रही है और न ही पीछे हो पा रही है।

नई दिल्ली, (नई दुनिया संवाददाता)। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआई एक बड़े उलझन में फंसी है, जिसके चलते वह न तो आगे बढ़ पा रही है और न ही पीछे हो पा रही है। इसकी जड़ में सुबूत के तौर पर मौजूद वह पेन ड्राइव है, जो मौजूदा समय में दिल्ली हाईकोर्ट की कस्टडी में है। इसे पाने के लिए सीबीआइ पिछले कई महीनों से हाईकोर्ट दौड़ रही है, पर कानूनी अड़चनों के चलते वह अभी तक उसे हासिल नहीं हो पाई है। सीबीआइ की स्टेटस रिपोर्ट में यही सबसे बड़ा अड़ंगा है।

इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने पेन ड्राइव मामले में सीबीआई को 11 जुलाई की फिर तारीख दी है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस दिन पेन ड्राइव की रिपोर्ट सीबीआइ को दे दे। यही वजह है कि सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट से 17 जुलाई को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा है जिसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया है।

खास बात यह है कि स्टेटस रिपोर्ट को लेकर सीबीआइ पिछले आठ महीने में करीब नौ बार सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग चुकी है। फिलहाल स्टेटस रिपोर्ट पेश करने की तारीख अभी तक 30 जून तय की गई थी। इससे पहले सीबीआइ ने अक्टूबर, 2015 में सुप्रीम कोर्ट को मामले की स्टेट्स रिपोर्ट दी थी।

व्हिसल ब्लोअर ने उठाए सवाल

व्यापम घोटाले की जांच में लगी सीबीआइ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने में की जा रही देरी पर जांच से जुड़े व्हिसल ब्लोअर डॉ. आनंद राय ने सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि वह सीबीआइ देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। जांच एजेंसी ने इसके अलावा भी व्यापम से जुड़े उन 15 मामलों को भी अभी तक जांच में नहीं शामिल किया है, जो इस पूरे मामले में बड़ा रहस्योद्घाटन कर सकते है।

अब स्टेटस पेश नहीं किया तो डायरेक्टर को लिखेंगे पत्र

ग्वालियर। व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ पर विशेष कोर्ट की फटकार का असर नहीं हुआ है। दस्तावेज व जांच स्टेटस पेश करने को लेकर सीबीआइ ने फिर से पुराना जवाब पेश कर दिया कि अभी जांच चल रही है। इसलिए वक्त दिया जाए।

सीबीआइ के इस जवाब को लेकर कोर्ट ने चेतावनी दी है कि 20 जुलाई तक जांच का स्टेटस पेश नहीं किया तो सीबीआई डायरेक्टर को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा। मध्य प्रदेश बनाम गुलाब सिंह माथुर केस का चालान एसआइटी ने पेश किया था। इस केस के आरोपियों पर आरोप तय होने हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं होने से आरोप तय नहीं हो पा रहे हैं।

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