कश्मीर को लेकर भारत पाक में तल्खी बढ़ी

Jun 03, 2016

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो । भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बीच भले ही कुशल क्षेम पूछने के लिए आपस में बातचीत हो रही है लेकिन दोनों देशों में जिस तरह से तनाव बढ़ता जा रहा है उससे हाल फिलहाल द्विपक्षीय वार्ता के शुरु होने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति मामून और कई सांसदों की तरफ से वहां कश्मीर का राग अलापने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के पाकिस्तान की तरफ से हो रही कोशिशों को भी भारत कड़ी निंदा की है। भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया है कि दोनों देशों के बीच कश्मीर मुख्य मुद्दा नहीं है बल्कि पाकिस्तान जिस तरह से भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है वह मुख्य मुद्दा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि कश्मीर तनाव का मुख्य मुद्दा नहीं है जैसा कि पाक की तरफ से प्रचार किया जा रहा है। मुख्य मुद्दा यह है कि बाहरी शक्तियों की मदद से आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है जिससे इस क्षेत्र में शांति स्थापित नहीं हो पा रही है। भारत यह भी बताना चाहता है कि जम्मू व कश्मीर मुद्दे का कोई और अंतरराष्ट्रीय पहलू नहीं है। कुछ लोग बेवजह इसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश क रहे हैं। पाकिस्तान को चाहिए कि वह जल्द से जल्द जम्मू व कश्मीर के जिस हिस्से पर गैर कानूनी तरीके से कब्जा जमाये हुए है उसे खाली करे। सनद रहे कि भारतीय संसद पूर्ण सहमति से यह प्रस्ताव पारित कर चुका है कि जम्मू व कश्मीर का पूरा हिस्सा भारत का अभिन्न अंग है।

यही नहीं भारत ने चीन की मदद से बनने वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक कारीडोर (सीपीईसी) को लेकर भी भारत ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह इस पर चुप्प नहीं बैठने वाला। स्वरूप का कहना है कि सीपीईसी का निर्माण पाक की तरफ से अवैध तरीके से कब्जा जमाये कश्मीर के हिस्से पर करने की योजना है। भारत इसके सख्त खिलाफ है। भारत ने चीन से कहा है कि वह इस पर कोई निर्माण कार्य नहीं करे। चीन से भारत ने कई स्तरों पर इस मुद्दे को उठाया है। सनद रहे कि स्वरूप ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति मामून हुसैन के इस बात को भी नकारा है कि द्विपक्षीय वार्ता से भारत भाग रहा है।

जानकारों की मानें तो जिस तरह से भारत और पाकिस्तान में तल्खी बढ़ रही है उसे देखते हुए हाल फिलहाल द्विपक्षीय समग्र वार्ता की उम्मी द नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच दिसंबर, 2015 में समग्र वार्ता की सहमति बनी थी। लेकिन पठानकोट हमले के बाद इसे टाल दिया गया। उसके बाद से दोनों पक्ष आधिकारिक तौर पर यह कह रहे हैं कि उनके विदेश मंत्रालयों के अधिकारी आपस में संपर्क में है। लेकिन हकीकत यही है कि द्विपक्षीय वार्ता की सूरत निकलती नहीं दिख रही है।

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