अगर आपके बैंक खाते से होता है फ्रॉड तो सबसे पहले करें ये काम

Aug 12, 2016
भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन फ्रॉड पर अंकुश लगाने के लिए जारी किये दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट तैयार किए हैं।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अगर आपके बैंक खाते से बिना अनुमति के पैसा निकलता है या आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर खरीदारी होती है तो इसकी सूचना अपने बैंक को देने में कोई देरी मत कीजिए। बेहतर होगा कि तीन दिनों के भीतर ही इसकी सूचना दे दीजिए। ऐसा करने पर आपको नहीं बल्कि बैंक को वित्तीय दायित्व उठाना होगा।

अगर इसकी सूचना चार से सात दिन के भीतर दी जाती है तो 5000 रुपये तक का वित्तीय दायित्व ग्राहक को उठाना होगा। लेकिन बैंक का वित्तीय दायित्व तभी होगा जब ग्राहक की कोई गलती या भूमिका न हो। ये प्रावधान भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन फ्रॉड पर अंकुश लगाने के लिए जारी किये दिशानिर्देशों क ड्राफ्ट में किये हैं।

इसमें कहा गया है जिस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोग बैंकिंग ढांचे में आ रहे हैं उसे देखते हुए उन ग्राहकों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए बैंक ने यह व्यवस्था करने का प्रस्ताव किया है। इसके मुताबिक ऑनलाइन फ्रॉड होने या ग्राहक की अनुमति के बिना पैसा निकाला जाता है और ग्राहक उसकी जानकारी सात दिनों के बाद बैंक को देता है तो ग्राहक को ज्यादा आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। ऐसे मामलों के लिए हर बैंक को अपनी नीति बनानी होगी। इस नीति को मंजूरी संबंधित बैंक के निदेशक बोर्ड की तरफ से मिलेगी।

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ऐसे में ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे फ्रॉड होने के तुरंत बाद बैंक को इसकी सूचना दे। अगर जांच में यह पता चलता है कि गलती बैंक के स्तर पर थी या किसी तीसरे पक्ष ने कोई गड़बड़ी की है तो ग्राहक को कोई हानि नहीं उठानी पड़ेगी। बशर्ते इसकी सूचना तीन दिन के भीतर दी जाए। इसमें यह भी कहा गया है कि ग्राहक से सूचना मिलने पर उसके खाते से निकाली गई राशि को दस दिनों के भीतर बैंक को वापस उसके खाते में जमा करनी होगी। अगर जांच में ग्राहक की गलती या भूमिका पता चलती है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा यानी बैंक उसे पैसे वापस नहीं करेगा।

अगर ग्राहक चार से सात दिनों के भीतर सूचना देता है और जांच में ग्राहक की भूमिका स्थापित नहीं होती है तो उसका वित्तीय दायित्व 5000 रुपये तक सीमित होगा। यानी 5000 रुपये तक का नुकसान होने पर उसे पूरा नुकसान उठाना होगा और नुकसान की राशि इससे ज्यादा है तो भी उसका नुकसान अधिकतम 5000 रुपये ही होगा। बैंकों को कहा गया है कि वे इस तरह की शिकायतों का 90 दिनों के भीतर निपटारा करे।

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