रमजान में दिखता है अयोध्‍या का दूसरा चेहरा ‘छोटी मक्‍का’

Jun 07, 2016
रमजान के पवित्र महीने के दौरान अयोध्‍या का दूसरा पहलू सामने आता है, जिसे ‘छोटी मक्‍का’ के तौर पर जाना जाता है।

मनीपरबत (अयोध्या)। अयोध्या को भगवान राम के नाम से जानते हैं क्योंकि राम की जन्मभूमि मामले में विवाद से यह जगह संबंधित है। इसके अलावा यह ‘छोटी मक्का’ के नाम से भी जाना जाता है। अयोध्या का यह दूसरा चेहरा रमजान के पवित्र महीने में सामने आता है।

तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा, ‘इस मंदिर वाले शहर में कम से कम 20 ऐसे पवित्र स्थान हैं जो मुस्लिमों के लिए महत्वपूर्ण है। हिंदुओं को भी ये जगह आकर्षित करती है।‘ यहां 100 से अधिक मस्जिद हैं, हिंदू भाईयों को सम्मान देते हुए इन जगहों पर वेजिटेरियन कोड का पालन सख्ती से किया जाता है।

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मुस्लिम धार्मिक नेता मोहम्मद उमर ने कहा, ’इन मजारों, मस्जिदों और मकबरों की उपस्थिति से अयोध्या को ‘छोटी मक्का’ के रूप में भी जाना जाता है। इस्लाम को मानने वालों के लिए मक्का के बाद अयोध्या का स्थान है। मौलवी मोहम्मद अकरम ने आगे कहा कि सेक्युलर मुस्लिम भगवान राम को पैगंबर के तौर पर मानते हैं, और कुरान के अनुसार हमें सभी पैगंबर को इज्जत देनी चाहिए।‘

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अयोध्या के सांस्कृतिक धरोहर व वसीयत के संरक्षण के लिए काम कर रहे 110 वर्ष पुराने, श्री सरयू अवध बालक समिति के संयोजक, कृष्ण कुमार उर्फ बर्फी महाराज ने कहा, ‘अयोध्या शायद भारत का एकमात्र जगह है जहां इस्लामी पैगंबर हजरत शीस का मजार है और इसकी वजह से मुस्लिमों के लिए यहां आना आवश्यक है।‘

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केयरटेकर मोहम्मद कलीन-उद्दीन फिरदौसी ने कहा, ‘हजरत शीस पृथ्वी पर आने वाले पहले इंसान हजरत आदम की संतान थे। इन्होंने ही जिंदगी के महत्व का सार बताया था।‘ अकबर के शासनकाल में लेखक अबुल फजल ने इस मजार के बारे में लिखा, ‘यह मजार करीब 600 वर्ष पुराना है। ये पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सबसे पहले शिशु थे और पृथ्वी पर करीब 1000 वर्ष रहे।‘

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