इस मामले में नेहरू- गांधी परिवार से कहीं आगे निकले पूर्व PM वाजपेयी

Sep 06, 2016
इस मामले में नेहरू- गांधी परिवार से कहीं आगे निकले पूर्व PM वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर आज केंद्र की कई फ्लैगशिप योजनाएं चल रही हैं।

नई दिल्ली। वर्ष 2004 में गर्मियों के दौरान राजमार्गों पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीरों को आगे रखकर बार-बार दिखाया जा रहा था कि देश कैसे आगे बढ़ रहा है। वाजपेयी के नेतृत्व में दोबारा सत्ता में काबिज होने के लिए तब एनडीए सरकार ने ‘इंडिया शाइनिंग’ स्लोगन के नाम पर जिस प्रचार अभियान को चलाया था उस पर 125 करोड़ रुपये खर्च हुए।

तब भारतीय जनता पार्टी ने ‘दृष्टि अटल पर, वोट अबकी बारी अटल पर’; ‘हरी’; ‘द मैन अवेट्स इंडिया’ जैसे नारे दिये थे जिससे वो अटल जैसी शख्सियत का फायदा उठाकर चुनावी लाभ ले सके। हालांकि चुनावी परिणाम प्रचार के उलट रहा।

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सम्मान के मामले में नेहरू गांधी परिवार को पीछे छोड़ा

2014 में प्रचंड बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार सत्ता पर आसीन हुई, लेकिन उसके केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी थे। वर्तमान सरकार ने सर्वाधिक योजनाओं और संस्थानों को अटल बिहारी बाजपेयी का नाम दिया गया है। टीओआई के मुताबिक, जिंदा रहते हुए इस तरह का सम्मान पाने के मामले में अटल जी अपने पूर्ववर्तियों, नेहरू-गांधी परिवार के उन दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है जिन्हें मरणोपरांत इस तरह का सम्मान मिला था।

हालांकि, महात्मा गांधी सहित नेहरू-गांधी वंशावली इस मामले में फिलहाल सभी भारतीय नेताओं में आगे है। अभी जिन अधिकतर योजनाओं और संस्थानों के नाम नेताओं के नाम पर हैं उनमें अधिकतर अब इस दुनिया में नहीं है।

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अटल के नाम पर दर्जनभर योजनाओं का नाम

भारत में दक्षिणपंथी राजनीति के अगुवा रहे बाजपेयी के नाम पर मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। लगभग दर्जनभर सामाजिक कल्याण की योजनओं को अटल के नाम पर रखा गया है। एनडीए सरकार ने अटल के जन्म दिन 25 दिसंबर को ‘गुड गवर्नेंस डे’, पीएम पेंशन योजना को ‘अटल पेंशन योजना’ का नाम दिया गया है। 2015 में अटल बिहारी भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था। आज अटल पेंशन योजना एऩडीए की प्रमुख योजनाओं में से एक है।

पिछले वर्ष पीएम मोदी ने शहरी बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण के लिए जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के स्थान पर अटल मिशन फॉर रिन्यूवेनेशन एण्ड अरबन ट्रांसफॉरमेशन (अमृत) की शुरूआत की।

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यहाँ तक कि भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों ने भी इस मामले में दरियादिली दिखाई है। राजस्थान सरकार ने राजीव गांधी सेवा केंद्रों का नाम बदलकर अटल सेवा और सुविधा केंद्र कर दिया है। 9,000 ग्राम पंचायत केंद्रों को वाजपेयी के नाम पर रखा गया है। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार भी पीछे नहीं है।

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