एफएमडी से सालाना 20 हजार करोड़ का नुकसान

Aug 28, 2016
बरसात के मौसम में होनेवाली संक्रामक बीमारियों के चलते सालाना करीब 20 हजार करोड़ रूपये का नुकसान होता है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मवेशियों में बरसात के मौसम में फैलने वाली संक्रामक बीमारी खुरपका और मुंहपका (एफएमडी) से सालाना 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है। सरकार इस रोग पर नियंत्रण पाने के हर संभव उपाय कर रही है। इसके तहत जिन राज्यों में टीकाकरण अभियान परंपरागत तरीके से नहीं चलाया जा रहा था, वहां भी यह चलेगा। सरकार का अनुमान है कि एफएमडी मुक्त होने में भारत को अभी कुछ और साल लग सकते हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुमान के मुताबिक एफएमडी के चलते दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता में भारी गिरावट आ जाती है, जबकि मांस का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। मांस का निर्यात ठप हो जाता है। पशुओं का स्वास्थ्य बहुत खराब हो जाता है। आईसीएआर की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक इसका परोक्ष नुकसान भी बहुत अधिक होता है। मादा पशुओं में गर्भधारण नहीं हो पाता है, जबकि गर्भधारण करने वाले पशुओं में गर्भपात की दर बहुत अधिक हो जाती है।

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मवेशियों में होने वाली इस तरह की क्षति को रोकने के लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम करना शुरू कर दिया है। चालू वित्त वर्ष 2016-17 में खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारी की रोकथाम के लिए सरकार ने टीकाकरण के बाबत एक सौ करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके तहत जिन जगहों पर इसका प्रकोप शुरू होगा, वहां इसके विरुद्ध युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। वैसे तो यह अभियान पहले से चल रहा है, लेकिन इसे और कारगर तरीके से चलाया जाएगा।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, राजस्थान, बिहार, पुडुचेरी, दिल्ली, अंडमान व निकोबार, दादरा नगर हवेली, दमन दीव और लक्षद्वीप में यह अभियान तेज किया जाएगा। इसके अलावा शेष राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।

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देश के विभिन्न राज्यों में एफएमडी का प्रकोप लगातार घटा है। पशुधन के महत्त्‌व और एफएमडी से होने वाले नुकसान के मद्देनजर सरकार ने तय किया है कि देश को जल्द ही इस संक्रामक रोग से मुक्त करा लिया जाएगा। देश के 16 राज्यों में मवेशियों को प्रत्येक छह महीने में पहले से ही टीका लगाया जा रहा है। अब इन राज्यों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत टीकाकरण बढ़ा दिया जाएगा।

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