UP: कमाल का प्रोफेसर, IMF मतलब- ‘International Money Found’

Jul 01, 2016
उत्‍तर प्रदेश में अंग्रेजी और इकॉनॉमिक्‍स के दो प्रोफेसर अपने विषय के बारे में बताने में नाकाम रहे।

आगरा। पिछले दिनों बिहार बोर्ड की परीक्षा टॉप करने वाली छात्रा रुबी रॉय को गिरफ्तार कर लिया गया था। रूबी ने पॉलिटिकल सांइस को ‘प्रोडिकल साइंस’ कहा था। अब उत्तर प्रदेश में इसी तरह का मामला सामने आया है। लेकिन यहां मामला बिल्कुल उलट है, गड़बड़ी ना छात्रों ने नहीं की है और ना ही अध्यापकों ने बल्कि गलती करने वाले हैं कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अंग्रेजी के एक एसोसिएट प्रोफेसर ‘ईवेल्यूऐशन’ (evaluation) का उच्चारण तक नहीं कर पाए। एक अर्थशास्त्र के लेक्चरर को ना ही यह पता था कि ऑडिट का मतलब क्या होता है और ना ही आईएमएफ का पूरा अर्थ। कुछ अध्यापकों को तो ये भी नहीं पता था कि अखिलेश यादव कौन हैं और ये भी नहीं पता था कि भारत को कब आजादी मिली थी।

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यह गलती सोमवार को तब पकड़ में आयी जब इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट (आईटीएचएम) में बीए की अंग्रेजी, इतिहास और अर्थशास्त्र की उत्तर पुस्तिका की जांच कर रहे दो अध्यापकों की योग्यता पर केंद्र की ओर से भेज गए मूल्यांकन कॉर्डिनेटर को शक हुआ। दोनों के पास उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त कॉलेज से वैध डिग्री है।इस बार में जब टाइम्स ऑफ इंडिया ने यूपी के राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के चांसलर रामनाइक से बात की तो उन्होंने कहा, "मुझे टीचरों की डिटेल मेल कर दो। मैं इसकी जांच कराउंगा और उचित कार्रवाई करूंगा।"

श्याम बहादुर अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं और महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली में तैनात हैं, वहीं अनिल कुमार पाल अर्थशास्त्र के एसोसियट प्रोफेसर है और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी, जौनपुर में तैनात है। दोनों पिछले एक दशक से ज्यादा समय से शिक्षण कार्य में तैनात है।

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आईटीएचएम के डायरेक्टर लवकुश मिश्रा ने टीओआई को बताया, "अंग्रेजी के अध्यापक ने पेपर जांचने को लेकर लिखे गए दो लाइन के आवेदन पत्र में गलत व्याकरण लिखी और वह अपने विषय के सामान्य प्रश्नों के उत्तर तक नहीं दे पाया। वहीं अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अनिल कुमार पाल ‘ऑडिट’ का मतलब तक नहीं बता पाए उनके अनुसार आईएमएफ(इंटरनेशनल मोनेटरी फंड) का मतलब है इंटरनेशनल मनी फाउंड। दोनों प्रोफेसरों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है।

टीओआई के अनुसार इन टीचरों को नियुक्त करने के पीछे एक बहुत बड़ा गिरोह काम करता है। अधिकतर उन निजी कॉलेजों में कार्य करते हैं जिन्हें प्रभावशाली लोंगों द्वारा चलाया जाता है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कैसे इन्होंने प्रथम श्रेणी में अपनी डिग्री प्राप्त की।

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