नमामि गंगे’ परियोजना को आगे बढ़ाते हुए PM मोदी

Mar 28, 2016

नरेन्द्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना को आगे बढ़ाते हुए गंदे एवं प्रदूषित जल का शोधन करके उसे बेचने के बाजार तलाशने शुरू कर दिए हैं.

गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की नरेन्द्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना को आगे बढ़ाते हुए इस पवित्र नदी के गंदे एवं प्रदूषित जल का शोधन करके उसे बेचने के बाजार तलाशने शुरू कर दिए हैं. इस संदर्भ में भारतीय रेलवे और नदी के किनारे लगे कुछ विद्युत संयंत्रों से करार भी हो चुके हैं.

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम को आगे बढ़ाया जा रहा है. नदी के किनारे वाले क्षेत्र में वृक्षारोपण कार्य के अलावा नदी में बहाये जाने वाले गंदे जल को शोधित करने एवं शोधित जल के लिए बाजार तैयार करने का काम किया जा रहा है.

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी के बारे में किये गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि जितने भी जलमल शोधन संयंत्र हैं, उनमें से 40 प्रतिशत ही काम कर रहे हैं. इसके चलते नदी में 90 प्रतिशत गंदा एवं प्रदूषित जल बिना शोधित अवस्था में बहाया जा रहा है. यह सबसे बड़ी चुनौती है. जल संसाधन मंत्रालय यह रूपरेखा तैयार कर रहा है कि शोधित जल कैसे बिक सकता है? इस उद्देश्य के लिए निजी क्षेत्र को भी जोड़ा जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि शोधित जल के लिए बाजार तैयार करने की पहल के तहत रेलवे के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है. इसके तहत शोधित जल का उपयोग रेलवे कोच और पटरियों की साफ सफाई में किया जाएगा. इसके अलावा गंगा नदी के 50 किलोमीटर के दायरे में जो भी विद्युत संयंत्र होंगे, वे शीतलन के लिए इसके शोधित जल का उपयोग करेंगे.

भारतीय वानिकी संस्थान (एफआरआई) ने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की . इसके तहत देश के भीतर गंगा नदी थाले के बहुत विशाल क्षेत्र में से पूर्व-परिसीमित 83,946 वर्ग किलोमीटर इलाके की आकाशीय निगरानी, मॉडलिंग के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करना शामिल है। गंगा को निर्मल बनाने के लिए कुछ समय पहले जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के साथ विद्युत संयंत्रों, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, युवा एवं खेल मंत्रालय, पोत परिवहन मंत्रालय ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था.

 

सहमति पत्र के अनुसार, गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए सात मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गई है साथ ही 21 कार्य बिन्दु तय किये गए हैं. गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार ने 2015 से 2020 के दौरान करीब 20 हजार करोड़ रुपये का कार्यक्र म तय किया है जिसमें 12728 करोड़ रूपये नये कार्यक्र मों के लिए तथा 7272 करोड़ रुपये अभी जारी कार्यक्रमों के लिए हैं. वहीं, एफआरआई की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में नदी किनारे के प्राकृतिक, कृषि और शहरी क्षेत्र पर प्रस्तावित वन रोपण और अन्य पारंपरिक संरक्षण विधियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए फील्ड डाटा प्रारूप के चार सेट तैयार किए गए हैं.

एफआरआई ने गंगा नदी के किनारे के पांच राज्यों से एफआरआई ने आठ हजार डाटा शीट्स प्राप्त की हैं. संस्थान ने संभावित वृक्षारोपण और ट्रीटमेंट मॉडलों से संबंधित आंकड़ों के मिलान, विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में मृदा और जल संरक्षण, नदी किनारे के वन्य जीव प्रबंधन, दलदली भूमि का प्रबंधन जैसे संरक्षण हस्तक्षेपों के अलावा प्राकृतिक, कृषि और शहरी क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण तथा नीति और कानूनी हस्तक्षेपों, संयुक्त शोध, निगरानी और मूल्यांकन जैसी सहायक गतिविधियों तथा जन जागरण अभियानों की परिकल्पना की गई है.

इन पांच राज्यों के लिए 40 अलग-अलग वृक्षारोपण और ट्रीटमेंट मॉडल्स का चयन किया गया है. यह परियोजना पांचों राज्यों के वन विभागों द्वारा पहले चरण में पांच साल (2016-2021) की अवधि में कार्यान्वित की जाएगी. इस परियोजना में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में पेड़-पौधे उगाने के लिए इको टास्क फोर्स की दो बटालियनों की सक्रि य भागीदारी की परिकल्पना की गई है.

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