मुस्लिम महिलायें शरियत के क़ानून में न ही बदलाव चाहती हैं और न ही किसी का हस्तक्षेप

Oct 25, 2016
मुस्लिम महिलायें शरियत के क़ानून में न ही बदलाव चाहती हैं और न ही किसी का हस्तक्षेप

बेंगलुरु में आयोजित मुस्लिम महिलाओं के सम्मेलन में महिलाओं ने अपने विचार का व्यक्त किया। इस अवसर पर मुंबई की आलिमा शमशाद बागबान ने कहा कि मुस्लिम महिलायें शरियत के क़ानून में न ही बदलाव चाहती हैं और न ही किसी का हस्तक्षेप। बागबान ने कहा कि मौजूदा दौर में कुछ पुरुषों की गलत हरकतों के कारण तीन तलाक और अन्य सिद्धांतों पर बहस हो रही है।बैठक के आयोजकों ने कहा कि न केवल मुसलमान बल्कि हिंदू, सिख और इसाई भी समान नागरिक संहिता का विरोध करें। ‘सम्मेलन’ खास महिलाओं के लिए था जिस में महिलाओं ने कहा कि मुस्लिम समाज में चाहे पुरुष हो या महिला, दोनों एक दूसरे के अधिकार को पहचानें और इसको बखूबी निभाएँ, मौजूदा दौर में कुछ पुरुषों की सरगर्मी की वजह से शरई कानून पर बहस हो रही है जबकि तथ्य यह है कि भारत की मुस्लिम महिलायें न तो शरीयत में कोई परिवर्तन चाहती हैं और न ही किसी तरह का कोई हस्तक्षेप।

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