गरीब बच्चों को पढाने के जुनून में मुस्लिम महिला ने घर को ही बनाया स्कूल

Sep 05, 2016
गरीब बच्चों को पढाने के जुनून में मुस्लिम महिला ने घर को ही बनाया स्कूल

आगरा के शाहगंज में रहने वाली शहनाज़ जिनके सिर पर गरीब बच्चों को पढाने का जूनून इस कदर चढा की उन्होंने अपने घर को ही स्कूल में तब्दील कर दिया है। शहनाज़ मजहब की दीवारों को तोड़ अपने घर में गरीब हिन्दू बच्चों को बिना फीस लिए पढ़ाती हैं। शहनाज बताती है कि यह उनकी बचपन से ही चाहत थी की वह समाज के लिए कुछ अलग करें। इसलिए उन्होंने बच्चों का भविष्य सँवारने के लिए यह कदम उठाया। अपने पांच कमरों के घर में शहनाज़ हफ्ते में 6 दिन, सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक स्कूल में बच्चों को हिंदी, इंग्लिश व उर्दू पढ़ाती हैं। जिस इलाके में शहनाज़ रहती हैं वह एक हिन्दू बहुल इलाका है जहाँ आस-पास रीब लोग रहते हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस स्कूल में आस-पास से करीब 200 बच्चे पढ़ने आते हैं और सभी बच्चे गैर – मुस्लिम हैं । 45 साल की शहनाज़ की चार बेटियां और एक बेटा है। वे खुद 9वीं तक ही पढ़ी हैं पर इसके बावजूद पढ़ाने का जज्बा उनकी अधूरी शिक्षा पर भारी पड़ा और आज सैकड़ों बच्चों की वो सबसे प्यारी टीचरजी बन गई हैं। शहनाज बताती हैं, ‘शुरुआत में उनके इस काम में थोड़ी अड़चनें आईं, लेकिन मेरे पति मुवीन खान ने मेरी बात को समझा और मेरा साथ दिया।’ शहनाज का सपना इन गरीब बच्चों के लिए कुछ करने का है।

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