प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर बोला हमला, सांसदों को गरिमापूर्ण आचरण करने की सलाह

Mar 03, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सांसदों को गरिमापूर्ण आचरण करने की सलाह देते हुए कहा कि यह उपदेश उनका नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का है.

राहुल गांधी की ओर से अपने ऊपर बुधवार को किए गए प्रहार के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को उनके पिता राजीव गांधी, दादी इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के उद्धरणों और स्टालिन के एक संदर्भ का सहारा लेते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष और अध्यक्ष सोनिया गांधी पर जबर्दस्त पलटवार किया.

राहुल के बुधवार के इस आरोप पर कि प्रधानमंत्री से सब मंत्री और भाजपा सांसद डरते हैं और कुछ बोलते नहीं, मोदी ने तत्कालीन सोवियत संघ तानाशाह नेता जोजफ स्टालिन से जुड़े एक प्रसंग को सुनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि स्टालिन के निधन के बाद सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने निकिता खुश्चेव एक बार पार्टी की महासभा में स्टालिन को काफी बुरा भला कह रहे थे, जिस पर सभा में बैठे किसी सदस्य ने उनसे सवाल किया कि तब वह (खुश्चेव) कहां थे? इस पर खुश्चेव ने कहा कौन है यह? और उस व्यक्ति के सामने नहीं आने पर सोवियत नेता ने कहा, ‘‘मैं वहीं था, जहां आज तुम हो’’.

मोदी ने इस संदर्भ को कांग्रेस नेतृत्व पर पलटवार करने के लिए इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘‘हम सभी लोग सार्वजनिक जीवन में जवाबदेह हैं और कोई भी हमसे सवाल पूछ सकता है. लेकिन कुछ हैं जिनसे कोई सवाल नहीं पूछ सकता और न पूछने की हिम्मत करता है और जो पूछता है उसका हश्र क्या होता है, मैंने देखा है.’’

राहुल और सोनिया गांधी पर परोक्ष प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सदन क्यों नहीं चलने दिया जा रहा? सदन हीनभावना के कारण नहीं चलने दिया जा रहा. संसद में ऐसे और भी होनहार, तेजस्वी सांसद हैं जिन्हें सुनना अपने आप में एक थाती है. लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि यदि ऐसे होनहार तेजस्वी सदस्य बोलेंगे तो हमारा क्या होगा?

मोदी ने इसी क्रम में कहा, ऐसे लोग चाहते हैं कि, ‘‘विपक्ष में कोई ताकतवर नहीं बन जाए. विपक्ष में कोई होनहार नहीं बनना चाहिए कोई तेजस्वी नहीं दिखना चाहिए. उनकी प्रतिभा का परिचय देश को नहीं हो पाए ये हीनभावना है.’’

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो सत्रों में विपक्ष के ऐसे किसी होनहार सदस्य की बात हमें सुनने को नहीं मिली.
इस पर खड़गे ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए. और मोदी ने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘मेक इन इंडिया का मजाक उड़ा रहे हैं. क्या यह सही है? अगर यह सफल नहीं है तो उसे सफल बनाने के लिए चर्चा करनी चाहिए, सुझाव देने चाहिए.’’

उन्होंने कहा कि 14 सालों से आलोचना सुनता आ रहा हूं. वास्तव में इन वर्षों में आलोचना से अधिक आरोप ज्यादा लगे. लगातार उपदेश भी सुनता रहता हूं. मुझे अब इनसे कोई समस्या नहीं होती. उपदेश सुनता रहता हूं, आलोचनाएं सहता रहता हूं. 14 सालों में इन सब के साथ जीना सीख गया हूं.

इस संदर्भ में उन्होंने तुलसीदास की रामायण का एक दोहा पढ़ा : ‘‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचारही ते नर न घनेरे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह देश उस वाकये को नहीं भूल सकता जब हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 27 सितंबर 2013 को अमेरिका में थे और एक प्रेस वार्ता में उस अध्यादेश को फाड़ दिया गया था जिसे उस समय की कैबिनेट ने पारित किया था जिसमें फारूक अब्दुल्ला, ए के एंटनी, शरद पवार जैसे महानुभाव थे.’’

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की प्रति को फाड़ दिया था.

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम अपने देश की खराब छवि पेश करेंगे और ऐसा पेश करेंगे कि जैसे हम भीख का कटोरा लिखे खड़े हैं तो दूसरे भी चीख कर हमारा उपहास उड़ाएंगे.’’ मोदी ने फिर कहा, ‘‘यह मैं नहीं कह रहा हूं. यह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंद्रप्रस्थ कॉलेज में दिए अपने एक भाषण में कहा था.’’

मोदी ने संसद में व्यावधान डाले जाने के संदर्भ में कहा, ‘‘पिछले दिनों सदन में जो कुछ हुआ, उससे मैं पीड़ित और दुखी हूं. सदन के ना चलने से सत्ता पक्ष का कम और विपक्ष का ज्यादा नुकसान होता है, वे जनता के मुद्दे नहीं उठा पाते. कितनी ही नाराजगी हो, विरोधी विचार हो यह वह मंच है जहां तर्क रखे जाते हैं, तीखे सवाल किए जाते हैं सरकार को जवाब देना होता है, अपना बचाव करना होता है, सफाई देनी होती है. बहस में किसी को बख्शा नहीं जाता और बख्शा जाना भी नहीं चाहिए पर बहस के दौरान गरिमा रखी जाए, साख बनी रहे तो बात अधिक मजबूती से रख पाएंगे.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह उपदेश भी नरेन्द्र मोदी का नहीं है, यह श्रीमान राजीव गांधी ने कहा था.’’

 

 

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