मां गांव छोड़कर आ गयी शहर मजदूरी करने, 14 साल की बेटी निभा रही थी 4 भाई-बहनों के लिए मां-बाप का फर्ज

Jul 01, 2016

हरदा, मप्र। सीडब्ल्यूसी, चाइल्ट लाइन, रहटगांव पुलिस और जिला पंचायत सीईओ की पहल पर पिछले तीन महीने से अपनी मां से अलग रह रहे 5 बच्चे फिर मिल गए है। नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार रहटगांव में एक पति ने 8 महीने पहले अपनी पत्नी और पांच बच्चों को छोड़कर कहीं चला गया। जिसके बाद 5 महीने तक गांव में ही मजदूरी कर मां ने अपने 3 लड़के और 2 लड़कियों (सभी नाबालिग) को पालने की कोशिश की, लेकिन गांव की मजदूरी से दो वक्त की रोटी की जुगाड़ कर पाना भी मुश्किल हो रहा था।

इसलिए मां 3 महीने पहले गांव को छोड़कर हरदा मजदूरी करने के लिए आ गई। अपने चार छोटे भाई बहनों की जवाबदारी 14 साल की बेटी पर आ गई। बेटी ने भी भाई बहनों की देखभाल करने के लिए लोगों के घर पर बर्तन मांजना शुरू कर दिया। एक छोटा भाई भी गांव की एक होटल में काम करने लगा।
मां भी समय-समय पर पैसे भेजती, लेकिन उसके बाद भी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नही हो रही थी। दो तीन दिन पहले ही किराये न देने पर मकान मालिक ने बच्चों को घर से निकाल दिया। जिसके बाद बच्चे सड़क पर घूम रहे थे। सूचना मिलने पर चाइल्ड लाइन ने रहटगांव पुलिस की मदद से बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया। जहां से जिला सीईओ की मदद से बच्चों और उनकी मां का पुनर्वास किया गया।

जैसे ही सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष वेद विश्नोई और अन्य सदस्य ने मामला जिला पंचायत सीईओ षणमुख प्रिया मिश्रा के सामने रखा। जिला सीईओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पुनर्वास में मदद की। सीईओ ने वन विभाग के अधिकारियों से बात कर अस्थायी रूप से फॉरेस्ट के पर्यावरण भवन में पांचों बच्चों और उनकी मां का रहने का इंतजाम कराया। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी को पांचों बच्चों का एडमिशन स्कूल में कराने के निर्देश दिये। सीडब्ल्यूसी के वेद विश्नोई ने कहा कि जिला सीईओ की इस पहल से बच्चे अब अपनी मां के पास रह सकेंगे।

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