मोदी ने मनमोहन पर कसा तंज, कांग्रेस ने कहा मांगें माफी

Feb 08, 2017
मोदी ने मनमोहन पर कसा तंज, कांग्रेस ने कहा मांगें माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों और पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तीखा तंज कसा, जिसके चलते सदन में हंगामा उठ खड़ा हुआ। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि ‘रेनकोट पहनकर नहाना कोई मनमोहन सिंह से सीखे’।

मोदी के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और यहां तक कहा है कि जब तक वह माफी नहीं मांगते उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ कांग्रेस द्वारा जारी एक पुस्तिका पर तंज कसते हुए कहा, “मनमोहन सिंह पिछले 30-35 वर्षो से देश की आर्थिक गतिविधियों से सीधे तौर पर निर्णायक भूमिका में जुड़े रहे हैं..कोई और व्यक्ति नहीं रहा, आजादी के बाद के 70 वर्षो की अवधि में आधे समय तक वह शीर्ष पर रहे। इस दौरान इतने घोटाले हुए, लेकिन उन पर एक भी आरोप नहीं लगा। रेनकोट पहनकर नहाना तो कोई उनसे सीखे।”

मोदी की इस टिप्पणी पर हंगामा करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया और सदन से बाहर निकल गए। कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सदन का बहिष्कार किया।

सदन से बाहर आने के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी जब तक माफी नहीं मांगते, विपक्षी दलों को उन्हें सदन में बोलने नहीं देना चाहिए।

सिब्बल ने कहा, “जब सभी लोग बोल चुके होते हैं, मोदी उसके बाद सबसे अंत में बोलते हैं, फिर निराधार आरोप लगाते हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। जब तक वह अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते, हम उन्हें सदन में बोलने नहीं देंगे।”

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, “मोदी का बयान बेहद आपत्तिजनक था और प्रधानमंत्री के लिए यह अशोभनीय है।”

इससे पहले, सदन के अंदर प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर नोटबंदी के अपने फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि नोटबंदी राजनीतिक फैसला नहीं है और न ही यह किसी राजनीतिक दल को परेशान करने की लड़ाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते कि हमारे देश में यह बुराई (कालाधन और भ्रष्टाचार) आई है। इससे हम इनकार नहीं कर सकते कि इस बीमारी ने हमारी अर्थव्यवस्था में जड़ जमा ली है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसा पहली बार हुआ है कि जनता का मिजाज कुछ है और नेताओं का मिजाज उनसे अलग। इस बार सरकार और जनता साथ-साथ थी।”

मोदी ने नोटबंदी के फायदे गिनाते हुए कहा, “नोटबंदी से गरीबों को फायदा हुआ। गरीबों का हित छीन लिया जाता है और मध्यम वर्ग का शोषण होता है। हम कब तक इन समस्याओं को लेकर गुजारा करेंगे। दुश्मन देश में जाली नोटों का कारोबार करने वालों को आत्महत्या करनी पड़ी।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा नक्सलवादियों ने समर्पण किया है। सरकार ने असम के चाय बागान मजदूरों को बैंक खाते खुलवाए। इस कारण उन्हें पूरा वेतन मिलने लगा। जब इतनी ज्यादा धनराशि बैंकों के पास आई तो कर्ज देने की ताकत बढ़ी और ब्याज दर कम हुई।”

नक्सलवादियों वाले बयान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने सवाल उठाया तो मोदी ने कहा, “इस पर तो आप बेहतर मार्गदर्शन कर सकते हैं। नक्सलवादी समर्पण कर रहे हैं, इसका संतोष सदन में न हो यह कैसे हो सकता है।”

बयान के विरोध में कांग्रेस सदस्यों द्वारा सदन का बहिष्कार करने पर मोदी ने कहा, “मर्यादा अगर लांघते हैं तो सुनने की भी ताकत रखिए। पराजय स्वीकार ही नहीं करना है, यह कब तक चलेगा।”

प्रधानमंत्री ने बांगचू समिति की रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दिग्गज नेता ज्योति बसु को उद्धृत किया, जिसमें बसु ने वांगचू समिति की रिपोर्ट सदन में पेश न करने को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आलोचना की थी।

मोदी ने नोटबंदी पर वामदलों से समर्थन भी मांगा। उन्होंने कहा, “वामदलों से मेरा आग्रह है कि इस लड़ाई में मेरा साथ दीजिए। लोग इसे कड़ा फैसला बताते हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र में लोकप्रिय फैसले ही लिए जाते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया में कहीं इतना बड़ा और व्यापक निर्णय नहीं हुआ, इसलिए दुनिया के अर्थशास्त्रियों के पास भी इसके मूल्यांकन के लिए कोई मापदंड नहीं है।”

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