मोदी अगर महिलाओं के अधिकारों के इतने ही फिक्रमन्द हैं, तो पहले अपने घर से करें शुरुआत: रिजवाना खातून

Oct 28, 2016
मोदी अगर महिलाओं के अधिकारों के इतने ही फिक्रमन्द हैं, तो पहले अपने घर से करें शुरुआत: रिजवाना खातून

ट्रिपल तलाक को लेकर केन्द्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा अब दिन पे दिन बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के महोबा में मंच से राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ऑफ इण्डिया की महिला विंग अध्यक्ष रिजवाना खातून ने पीएम नरेन्द्र मोदी का इस पर एक कदम और आगे बढ़कर बयान देना चुनावी समय में इस मुद्दे को और बड़ा बनाया जा रहा है।

देखा जाये तो बहुत से महिलाओं और मुस्लिम संगठनों ने आगे आकर केन्द्र के इस फैसले का स्वागत किया है, पर मुस्लिम महिलाओं और खास तौर से पढ़ी लिखी महिलाओं की ओर से इसके विरोध में भी लगातार आवाज उठायी जा रही है। इस मामले को लेकर आजमगढ़ की रहने वाली महिला विंग अध्यक्ष रिजवाना खातून ने केन्द्र सरकार के इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोला। रिजवाना ने कहा कि तीन तलाक और शादी मुसलमानों के निजी और मजहबी हक़ हैं। मुसलमान संविधान में मिले धार्मिक अधिकार के तहत अपने धर्म के अनुसार ही शादी और तलाक वगैरह नियमों का पालन करेंगे। भारतीय संविधान हमें बिना किसी दबाव के अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। मुस्लिम महिलाएं इस आजादी में किसी भी सरकार या संगठन की रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगी।
उन्होंने इस बयान में आगे कहा की शरीयत खुद तीन तलाक को ‘गुनाह ए कबीरा’ करार देती है और सख्त पाबन्दी लगाती है। लेकिन तलाक मसले का हल भी इस्लाम ने दे रखा है। अगर इसका हल तलाशना है तो इस्लाम और शरीयत में ही तलाशना होगा, न कि अदालत और संसद में। अगर पीएम नरेन्द्र मोदी को महिलाओं के अधिकारों के लिए इस कदर फिक्रमन्द हैं तो पहले इसकी शुरुआत अपने घर से करें। इसके बाद वह दूसरों के घर मे देखे।

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>