मोदी 30 मार्च से बेल्जियम, अमेरिका एवं सउदी अरब तीन देशों के दौरे पर

Mar 23, 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 मार्च से बेल्जियम, अमेरिका एवं सउदी अरब तीन देशों के दौरे पर जाएंगे.

इस दौरान वह वाशिंगटन में महत्वपूर्ण परमाणु सुरक्षा शिखर बैठक तथा ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे तथा संवेदनशील खाडी क्षेत्र में भारत के महत्वपूर्ण भागीदार सऊदी अरब की यात्रा करेंगे.

सरकार ने मंगलवार को कहा कि मोदी का पहला ठहराव ब्रसेल्स में होगा. बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स कई बम धमाकों से थर्रा गया जिसमें 34 लोगों की जान गयी और 200 से अधिक घायल हो गये.

ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ-भारत शिखर बैठक में भाग लेने के अलावा मोदी अपने बेल्जियम समकक्ष चार्ल्स मिशेल से आपसी हितों के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करेंगे.

ब्रसेल्स से मोदी वाशिंगटन जाएंगे जहां वे 31 मार्च एवं एक अपैल को चौथे परमाणु सुरक्षा शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे. बैठक में प्रधानमंत्री परमाणु सुरक्षा को लेकर कुछ विशिष्ट घोषणाएं और प्रस्ताव कर सकते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि शिखर बैठक में भारत परमाणु सुरक्षा के बारे में राष्ट्रीय प्रगति रिपोर्ट सौंपेगा. भारत ने 2014.16 तक एनएसएस की तैयारी बैठकों में सकारात्मक योगदान दिया है. प्रधानमंत्री वाशिंगटन में कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग ले सकते हैं.

वाशिंगटन से प्रधानमंत्री दो अपैल को सऊदी अरब की राजधानी रियाद जाएंगे. शाह सलमाल बिन अब्दुलाजीज अल सऊद के निमंत्रण पर उनकी यह दो दिवसीय यात्रा होगी.

सऊदी अरब भारत का द्विपक्षीय व्यापार का चौथा सबसे बडा भागीदार है तथा दोनों के बीच 2014-15 में आपसी व्यापार 39 अरब डालर से अधिक रहा. सऊदी अरब भारत का कच्चे तेल का सबसे बडा आपूर्तिकर्ता है तथा कुल आयात में करीब एक बटा पांच योगदान देता है. सऊदी अरब में वर्तमान में करीब 29 लाख 60 हजार भारतीय नागरिक रहते हैं.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 2010 में सऊदी अरब यात्रा के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह इस खाडी देश की पहली यात्रा है. मोदी सऊदी अरब के शाह के साथ आपसी महत्व के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहु पक्षीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे.

परमाणु सुरक्षा शिखर बैठक के बारे में स्वरूप ने कहा कि यह परमाणु आतंकवाद को लेकर वैश्विक खतरे के बारे में शीर्ष नेताओं का ध्यान आकृष्ट करने में महत्वपूर्ण रही है तथा संवेदनशील परमाणु सामग्री एवं अन्य प्रौद्योगिकी तक आतंकवादियों एवं राज्य से इतर लोगों की पहुंच को रोकने के लिए फौरी उपाय किए जाने की आवश्यकता है.

आगामी शिखर बैठक में पूर्व एनएसएस के प्रस्तावों के बारे में हुए प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा भावी एजेंडा की रूपरेखा तैयार करने के मकसद से कार्य योजना बनायी जाएगी. एनएसएस की बैठक में 52 देश और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भाग लेने की उम्मीद है.

कई देश पिछली शिखर बैठक के बाद से परमाणु सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उनके द्वारा उठाये गये कदमों की जानकारी दे सकते हैं. यह काम राष्ट्रीय प्रगति रिपोर्ट के माध्यम से भी हो सकता है.

मोदी की ब्रसेल्स यात्रा के बारे में स्वरूप ने कहा कि भारत.यूरोपीय संघ शिखर बैठक का मकसद दोनों पक्षों के बीच सामरिक भागीदारी को मजबूती देना तथा भारत की प्रगति एवं विकास के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उन्नत गठबंधन करना है. पिछली शिखर बैठक 2012 में हुई थी.

भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों में कुछ खटास उस समय आयी जब 28 सदस्यीय इस संघ ने पिछले साल अपैल में मोदी की फ्रांस, जर्मनी एवं कनाडा यात्रा के दौरान उनके ईयू के मुख्यालय ब्रसेल्स जाने के नयी दिल्ली के प्रस्ताव का कोई उत्तर नहीं दिया था.  इसके चलते नयी दिल्ली ने पिछले साल मोदी के ब्रिटेन दौरे के समय उनकी यात्रा को अंतिम रूप देने के ईयू के प्रयासों को अधिक तवज्जो नहीं दी.

मोदी यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क तथा यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ज्यां क्लाड जंकर से मुलाकात करेंगे.

 

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