मोबाइल कंपनियों को कॉल ड्रॉप मामले में अंतरिम राहत नहीं

Mar 05, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्रॉप के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दूरसंचार कंपनियों की याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया.

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन की पीठ ने मोबाइल ऑपरेटर कंपनियों के समूह ‘सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) की याचिका की सुनवाई के दौरान कहा, ”यह अंतरिम आदेश से जुड़ा मामला है. हम इसकी सुनवाई गुरुवार (10 मार्च) को करेंगे. फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं होगा.”

न्यायमूर्ति जोसेफ ने मोबाइल कंपनियों के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से तब तक मामले की सुनवाई न करने का आग्रह करें. ट्राई में सात मार्च को सुनवाई होनी है.

न्यायालय ने इस मामले में केंद्र, ट्राई और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करके एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया. सीओएआई में वोडाफोन, भारती एयरटेल और रिलायंस सहित 21 मोबाइल ऑपरेटर शामिल हैं.

एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ”मैं मोबाइल ऑपरेटरों को कोई राहत प्रदान करने के खिलाफ हूं क्योंकि ट्राई का फैसला उपभोक्ता के हित में है.” इस पर न्यायालय ने कहा, ”हम इस मसले पर विचार करेंगे.” शीर्ष अदालत का मानना था कि उच्च न्यायालय के फैसला प्रथम दृष्टया गलत नजर नहीं आता है. यदि कॉल ड्रॉप की समस्या दूरसंचार कंपनियों की ओर से है तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना चाहिए.

ट्राई ने अपने फैसले में कहा था कि मोबाइल कंपनियों को एक जनवरी 2016 से प्रति कॉल ड्रॉप जुर्माना देना होगा, जिसे सीओएआई ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से उसे राहत नहीं मिली थी. इसके बाद उसने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

 

 

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