#MeToo: मॉडल ने सुनाई दर्दभरी दास्तां- ’14 साल की उम्र में कास्टिंग के लिए उतरवा दिए थे कपड़े’

Nov 07, 2017
#MeToo: मॉडल ने सुनाई दर्दभरी दास्तां- ’14 साल की उम्र में कास्टिंग के लिए उतरवा दिए थे कपड़े’

पिछले कई दिनों से दुनियाभर की कई सेलीब्रिटी महिलाएं अपने साथ हुए सेक्सुअल हैरासमेंट की घटनाओं को हॉलीवुड अभिनेत्री एलिसा मिलानो के जरिए शरू किए गए #MeToo कैंपेन में शेयर कर रही हैं। इस कैंपेन में एक और नया नाम जुड़ गया है। जिनका नाम सारा जिफ है। जो अभी 35 वर्षी की हैं।

बता दें कि अमेरिका की मशहूर मॉडल सारा जिफ ने #MeToo कैंपेन में अपने यौन शोषण की दर्दभरी दास्तां बताई है। उन्होंने बताया कि जब वो 14 साल की थीं तभी उनको इस छोटी सी उम्र में ही कास्टिंग के एक सेशन में यौन शोषण का शिकार होना पड़ा था। उन्होंने बताया कि वो 14 साल की उम्र में ही न्यूयार्क में रनवे शो और एड कैम्पेन में काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने इस खौफनाक अनुभव का खुलासा किया है।

सारा जिफ कहती हैं कि “उनके करियर की शुरुआत में उन्हें कास्टिंग सेशन के लिए एक फोटोग्राफ के अपार्टमेंट में जाना था। उस दौरान उनके साथ जाने के लिए उनके माता-पिता मौजूद नहीं थे, क्योंकि बहुत ही कम समय में यह अप्वाइंमेंट मिला था। ऐसे में उन्हें अकेले कास्टिंग सेशन के लिए जाना पड़ा। Cosmopolitan मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में सारा के हवाले से लिखा है।

कि ‘मैं जब फोटोग्राफर के अपार्टमेंट पर पहुंची। तो उसने पहले मुझसे कहा कि वह मुझे बिना शर्ट के देखना चाहता है। जिसके बाद उसने सारा से कहा वो अपना पैंट उतारें। जिसके बाद मैं मिकी माउस अंडरवियर और स्पोर्ट्स ब्रा में उसके सामने खड़ी थी। वो कहती हैं कि उस समय मेरे अंदर शारीरिक बदलाव भी नहीं हुए थे। इतना ही नहीं बल्कि कपडे उतरवाने के बाद उसने कहा कि हम लोग तुमको बिना ब्रा के देखना चाहते हैं। वो कहती हैं कि उसने जो मुझे बोला, वही मैंने किया। क्योंकि उस समय मुझे सिर्फ नौकरी चाहिए थी।’

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि, यह क्या हो रहा है। आगे वो कहती हैं कि जब वो 15 साल की हुईं तबभी उनको एक और ऐसे ही अनुभव से गुजरना पड़ा था। वो कहती हैं कि वह एक फोटो शूट के लिए गई हुई थीं। उन्होंने देखा कि वहां पर खुले में ड्रग्स बंट रही थी। वहां पर उनसे नग्न तस्वीरों के सामने पोज देने के लिए कहा गया था। इसके बाद 18 साल की उम्र में सारा ने मॉडल्स के साथ होने वाली रोजाना की बदसलूकी को लेकर एक प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया, जिसने साल 2010 में एक डॉक्यूमेंट्री का रूप लिया। जिसके बाद उन्होंने साल 2012 में मॉडल्स के अधिकारों को लेकर एक एनजीओ भी बनाया, जो कि मॉडल्स के अधिकारों के लिए काम करता है।

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