हमें इस खतरे से निपटने के लिए अर्थपूर्ण ढंग से सहयोग करने की जरूरत है: उपराष्ट्रपति

Jul 15, 2016

फ्रांस में हुए हमले की पृष्ठभूमि में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह आतंकवाद के साजिशकर्ताओं, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों के खिलाफ एकसाथ मिलकर त्वरित कार्रवाई करे.

मंगोलिया की राजधानी में आयोजित 11वें एशिया-यूरोप बैठक सम्मेलन के समग्र सत्र को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा, ‘हम सभी के समाज आज आतंकवाद के हर स्वरूप से अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहे हैं. सबसे हालिया उदाहरण फ्रांस में हुई सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना का है.’

अंसारी ने कहा, ‘हमें इस खतरे से निपटने के लिए अर्थपूर्ण ढंग से सहयोग करने की जरूरत है. आइए आज आतंकवाद के साजिशकर्ताओं, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करके आतंकवाद के अभिशाप को मिटाने के लिए एकसाथ काम करने का संकल्प लें.’

एक ट्रक फ्रांसीसी शहर नीस में एक भीड़ में जा घुसा. इस घटना में कम से कम 80 लोग मारे गए. फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि बास्तील डे के दौरान हो रही आतिशबाजी को देख रहे लोगों पर ‘आतंकी’ हमला किया गया.

एएसईएम सम्मेलन में कई यूरोपीय नेताओं ने हिस्सा लिया. इनमें जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल और यूरोपीय काउंसिल के डोनाल्ड टस्क भी शामिल थे. फ्रांस के शहर में मारे गए निदरेष लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया.

अंसारी ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि को शीघ स्वीकार किया जाना आज अनिवार्य हो गया है. मैं एएसईएम से इसे समर्थन देने की अपील करता हूं.’

उपराष्ट्रपति ने ‘अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुरूप सागरों और महासागरों जैसे हमारे साझा वैश्विक संसाधनों’  की सुरक्षा के लिए सहयोग का भी आह्वान किया.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण की ओर से विवादित दक्षिण चीन सागर पर चीन के ‘ऐतिहासिक अधिकारों’ के दावे को खारिज कर दिए जाने के कुछ दिन बाद अंसारी ने कहा, ‘आइए, हम अपने विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से, धमकियों या बल प्रयोग के बिना हल करें और शांति एवं स्थिरता को प्रभावित करने वाले विवादों को बढ़ावा दे सकने वाली गतिविधियों में आत्मसंयम बरतें. यूएनसीएलओएस से जुड़ा होने के नाते भारत सभी पक्षों से अपील करता है कि वे सागरों और महासागरों की अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था स्थापित करने वाले यूएनसीएलओएस के प्रति उच्चतम सम्मान प्रदर्शित करें.’

यह मुद्दा फिलीपीन ने उठाया था. फिलीपीन के अलावा वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान ने चीन के दावों को चुनौती दी थी.

सम्मेलन में चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग भी मौजूद थे.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एएसईएम आज एशिया और यूरोप के बीच बहुपक्षवाद के दो दशक का प्रतीक है.

अंसारी ने कहा, ‘एएसईएम आज एशिया और यूरोप के बीच एक गतिशील सेतु है. हमारे साझा प्रयास हमारे महाद्वीपों के बीच बहुपक्षीय संपर्क को बढ़ावा देते रहे हैं. इसलिए एएसईएम 11 की थीम ‘एएसईएम के 20 साल संपर्क के जरिए भविष्य के लिए साझेदारी’ उपयुक्त है.’

उन्होंने कहा कि विकास के लिए, लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए, व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने के लिए और निश्चित तौर पर शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा के लिए संपर्क मददगार है.

अंसारी ने कहा, ‘भौतिक संपर्क सिर्फ हमारे नागरिकों की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने, आपसी लाभ आधारित साझेदारियां बनाने और मिल जुलकर हमारी क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों से निपटने का तरीका है. हमें ऐसे संपर्क के तंत्रों का निर्माण करना चाहिए, जो सिर्फ भौतिक नहीं बल्कि समग्र रूप से व्यापक हों. इसमें संस्थानिक, डिजीटल, आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू भी शामिल किए जाने चाहिएं.’

अंसारी ने कहा कि सभी देशों को व्यापार एवं वाणिज्य को सुगम बनाने की दिशा में काम करना चाहिए और आपसी लाभ आधारित विकास के लिए संकलित उत्पादन तंत्र एवं मूल्यवान श्रृंखलाएं बनानी चाहिएं.

उन्होंने कहा, ‘आइए, सौर ऊर्जा संपन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे ऊर्जा गठबंधनों का निर्माण करें ताकि सभी को ऊर्जा सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा सके. आइए हमारे व्यवसायिक समुदायों, हमारे विविद्यालयों, सांस्कृतिक एवं नागरिक समाज के संगठनों के बीच साझेदारी के तंत्र बनाएं. इस सबसे ऊपर यह है कि शांति और सद्भाव का साझा मंच बनाने के लिए दिल और दिमाग के संबंध बनाए जाएं.’

उन्होंने कहा, ‘एएसईएम में हमारे लिए, लोकतंत्र और उदार मानवीय मूल्य महत्वपूर्ण घटक हैं. हमारा मेजबान मंगोलिया, लोकतांत्रिक अनुभव का हालिया और सफल उदाहरण है और हम उन्हें उनकी सफलता पर बधाई देते हैं.’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एएसईएम अपने तीसरे दशक में कदम रख रहा है. यह हम पर निर्भर है कि हम एएसईएम का एक जिम्मेदार और सकारात्मक मंच होना सुनिश्चित करें.

उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा कि एएसईएम को किसी वैश्विक एजेंडे को आकार तो देना ही चाहिए लेकिन साथ ही साथ उसे ठोस कदम की दिशा में भी बढ़ना चाहिए. इस दिशा में एक शुरूआत नवंबर 2013 में नयी दिल्ली में विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई थी. भारत इस दिशा में एक रचनात्मक सहयोगी बना रहेगा.

उन्होंने कहा, ‘जब हम आगे की तरफ देखते हैं तो एएसईएम की कुछ ताकतें दिखती हैं. ये ताकतें इसकी सदस्यता में विविधता, इसकी क्षमताओं का सह-समन्वय, राजनीतिक नेतृत्व की ताकत, इसकी अर्थव्यवस्थाओं की मजबूती हैं. ये ताकतें इसके तीसरे दशक के लक्ष्य में झलकनी चाहिए.’

अंसारी ने कहा कि उन्हें इस बात का यकीन है कि एएसईएम के सभी सदस्य एकसाथ मिलकर हमारे देशों एवं क्षेत्रों की साझा शांति, प्रगति एवं समृद्धि को बढ़ाने के लिए दो गतिशील महाद्वीपों- एशिया एवं यूरोप की साझा क्षमताओं को भुनाने की इस समूह की भूमिका को बढ़ाएंगे.

एएसईएम में 53 इकाईयां हैं. इनमें 51 देश एशिया और यूरोप से हैं जबकि दो क्षेत्रीय संस्थाएं – यूरोपीय संघ एवं आसियान सचिवालय हैं. यह विश्व की 62.3 प्रतिशत जनसंख्या, 57.2 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और लगभग 60 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है.

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