मालेगांव ब्लास्ट: कर्नल पुरोहित को जमानत मिली, 9 साल बाद आएंगे जेल से बाहर

Aug 21, 2017
मालेगांव ब्लास्ट: कर्नल पुरोहित को जमानत मिली, 9 साल बाद आएंगे जेल से बाहर

मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 9 साल बाद जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत न देने के ऑर्डर को खारिज करता है।

बता दें कि 9 साल पहले यानि 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में बम धमाका हुआ था। जिस में 7 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे। इस ब्लास्ट मामले में ‘साध्वी प्रज्ञा’ और ‘पुरोहित सहित’ समेत 12 लोग गिरफ्तार किए गए थे। जिस में साध्वी प्रज्ञा को पहले ही जमानत मिल चुकी है और अब इस मामले में पुरोहित सहित को भी सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरके अग्रवाल और एएम सप्रे की बेंच ने कहा कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट के उस ऑर्डर को खारिज करते हैं, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल को जमानत देने से इनकार किया गया था। लेकिन उसके साथ-साथ कोर्ट ने ये भी कहा कि वह लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत देने के लिए उन पर कुछ शर्तें भी लगा रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।

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पुरोहित ने 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि, उन्हें राजनीति के आपसी टकराव के चलते पकड़ा गया और वह 9 साल से जेल में के अंदर बंद हैं। उन्होंने पिटीशन में ये भी कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत तो दे दी गई। लेकिन, उनको जमानत देने से इनकार कर दिया। इसलिए उनको भी समानता के आधार पर जमानत मिलनी चाइये। आगे उन्होंने पिटीशन में यह भी कहा है कि हाईकोर्ट ने सेना की ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ की रिपोर्ट पर गौर नहीं किया गया, जिसमें ये कहा गया है कि वे सेना के लिए इंटेलीजेंस का काम करते थे।

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पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन, जब कोर्ट ने इस मामले में एनआईए से जवाब तलब किया जिसके जवाब में एनआईए ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत का विरोध किया था। क्योंकि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने माना था कि कर्नल पुरोहित बम बनाने और सप्लाई करने में उनका हाथ था।

बता दें कि इस से पहले मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर और उनके छह सहयोगियों को इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। जहाँ इनको 5 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी गई थी। उस समय कोर्ट ने ये कहा था कि प्रथम दृष्टया साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता और उसके साथ-साथ कोर्ट ने यह बातें भी कही थी कि ‘साध्वी प्रज्ञा एक महिला हैं और 8 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और वह काफी कमजोर हो गई हैं, बिना सहारे चलने में भी लाचार हैं।’

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