रोटी का मज़ाक वही उड़ाते है जिन्हें नहीं मालूम भूख क्या होती है !

Jun 08, 2016

जून महीने का पहला हफ्ता और 48° तापमान में रोज़ा रहना , सुबह 3:30 से जो खाना और पीना बंद हुआ तो शाम 7:18 मिनट तक 15 घंटे हलक के अंदर कुछ भी ना जाने देना ।

सामान्य दिनों में सुबह 7 बजे प्रातः से जो प्यास लगती है तो शाम 8 बजे तक कोई भी व्यक्ति कितना ठंडा पानी पी लेता है इसको नापना मुश्किल है। मैं अपनी बात करूँ तो लगभग 50 गिलास या 10 लीटर।

सभी खाद्य और पेय वस्तुओं से दूर , दिन गुजरते ही हलक का सूखना और फिर सूख सूख कर गर्दन की नसों का अकड़ जाना , ठंडा पानी , रूह अफ्ज़ा और कोल्ड ड्रिंक देख कर तिलमिलाना , फ्रिजर में शाम होते ही बोतलों में पानी को भर भर कर रखना और बार बार उसकी ठंडक को चेक करना ।

घड़ी के धीमे हो जाने का एहसास हो और मिनटों का घंटों में गुजरना , बार बार आसमान और उसकी लाली को देखना , और फिर ? अफ्तार का वक्त ।

पानी की बूँदों का हलक से उतरना और उसका आँख बंद करके सुखद एहसास करना जैसे पानी की एक एक बूँद से शरीर की उर्जा वापस आ रही हो।

मुस्लिमों के लिए यह धर्म का विषय है पर देश के करोड़ों लोगों के लिए यही जीवन है, बस उनको अफ्तार का सुखद अवसर नहीं मिलता।

यही है रोज़े का मकसद कि गरीबों के भूख और प्यास के एहसास को महसूस करो, जिससे उनकी भूख और प्यास को दूर करने का जज़्बा पैदा हो।

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