उत्तरी वजीरिस्तान में मदरसे आतंकी गतिविधियों के गढ़ : सरताज अज़ीज़

Mar 05, 2016

पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि अफगान पाक सीमा और कबायली इलाकों, खासतौर पर उत्तरी वजीरिस्तान के इर्द गिर्द स्थित मदरसे आतंकी गतिविधियों का केंद्र बन गए हैं.

उन्होंने इसके लिए अफगान शरणार्थियों को जिम्मेदार ठहराया, जो 9/11 के बाद अमेरिका द्वारा तालिबान को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद देश में घुस आए.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने इस हफ्ते रक्षा लेखकों के एक समूह से कहा कि इन मदरसों के पास कल्पना से परे आतंक का ठोस बुनियादी ढांचा है. यह बम बनाने के कारखाने चला रहे हैं. यह आतंकवादियों के प्रशिक्षण केंद्र हैं और इनमें फिदायीन हमलावरों को प्रशिक्षण दिया जाता है. यह सब मस्जिद के अंदर बहु मंजिला तहखाने में होता है.

उन्होंने कहा, ”मुझे याद है कि मिरानशाह में मैं एक मजिस्द में गया था, बाहर से हमें कुछ नहीं दिखा. लेकिन अंदर 70 कमरों का तीन मंजिला तहखाना था, जिसमें चार-पांच आईईडी कारखाने, चार-पांच फिदायीन प्रशिक्षण केंद्र, संचार नेटवर्क, खास कमरे, सम्मेलन कक्ष, अद्भुत बुनियादी ढांचा था.” उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में कैसे आतंक के बुनियादी ढांचे की गहरी जड़ें विकसित हो गईं.

अज़ीज़ ने अनुमान जताया कि उत्तरी वजीरिस्तान में इस तरह के बुनियादी ढांचे वाली 30-40 मजिस्दें हैं. उत्तरी वजीरिस्तान में जून 2014 में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब शुरू किया था. अफगान पाक सीमा से लगे पाकिस्तान के कबायली इलाकों में सात एजेंसियां हैं और उत्तरी वजीरिस्तान उनमें से एक है.

अज़ीज़ वाशिंगटन में छठी अमेरिका पाकिस्तान सामरिक वार्ता में शिरकत करने आए थे. उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए यह जानकारी दी.

अज़ीज़ ने कहा कि हमारे अनुमान के मुताबिक, खासतौर पर इस एजेंसी में इतने आईईडी कारखाने थे कि अगर ये बिना रूकावट के चलते रहते तो जिस तरह के हमले वे करते रहे हैं उसके लिए उनके पास अगले 20 साल के लिए पर्याप्त आईईडी था. उनको अब खत्म कर दिया गया है. संचार के बुनियादी ढांचे को बाधित किया गया है.

उन्होंने हालांकि पाकिस्तान के इन कबायली क्षेत्रों को आतंक का केंद्र बनाने के लिए अफगान शरणार्थियों को दोषी ठहराया.

उन्होंने कहा कि (आतंकवाद की) यह समस्या हमें 9/11 के बाद विरासत में मिली जब लोग सीमा पर से हमारी तरफ आ गए और वे हमारे लिए एक खतरा बन गए, क्योंकि वे दुनिया के अपने हिस्से पर अपनी पकड़ खो बैठे थे. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हमारी कबायली पट्टी, बहुत बड़ी है और बहुत खुला क्षेत्र है. इसलिए वे आए और खुद को स्थापित किया.

उन्होंने कहा कि शुरू में वह शरण मांगने आए थे, लेकिन जल्द उन्हें यह एहसास हो गया कि जबतक वह क्षेत्र और संसाधनों पर नियंत्रण हासिल नहीं कर लेते तबतक वे वहां बने नहीं रह सकते. इसलिए उन्होंने अपनी गतिविधियों का विस्तार करना शुरू कर दिया और 2007-2008 तक उन्होंने ज्यादातर कबायली क्षेत्रों तक अपने पैर पसार लिए. उन्होंने कबायली नेताओं को कत्ल किया, फिर उन्होंने अपना संचार नेटवर्क, आईईडी कारखानें, फिदायीन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने शुरू कर दिए.

 

 

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