जानिए- फेमस फुलकारी की कहानी

Apr 19, 2017
जानिए- फेमस फुलकारी की कहानी

आइए आज हम आपको अंधाधुंध फैशन में चल रही फुलकारी के बारे में ही बताते हैं। इंडियन फैशन में पटियाला का सूट सलवार और फुलकारी एंब्रायडरी को बहुत ही स्पेशल जगह दी गई है। फुलकारी की शुरुआत एक तरह की फूलों की कढ़ाई से हुई। जो कि अलग-अलग तरह के कपड़ों पर की जाती है। 15वीं शताब्दी में जब हीर रांझा की प्रेम कहानी बहुत ही ज्यादा प्रचलित हुई तब उसी समय पर फुलकारी का अविष्कार हुआ।

पारंपरिक तौर पर फुलकारी को कॉटन पर बनाया जाता था पर इसे मोटे कॉटन पर बनाया जाता है। जिसे हम खद्दर भी कह सकते हैं। खद्दर के कपड़े पर भारी कढ़ाई की जाती थी। और उसी को फुलकारी कहा जाता था।

कई प्रकार की कारीगरी में होती है फुलकारी

बाग– फुलकारी जिसमें बहुत ज्यादा घनी पढ़ाई होती है उसे बाग फुलकारी कहते हैं और फैब्रिक के बेस को फ्लोरल पैटर्न से पूरा किया जाता है।

थिरमा– थिरमा एक तरह की फुलकारी है जो की शुद्धता का प्रतीक होती है। इसके वाइट बेस की वजह से यह फुलकारी अक्सर ज्यादा उम्र की औरतें या विधवा ही पहनती हैं।

दर्शन द्वार– दर्शन द्वार भी एक तरह की फुलकारी है। यह फुलकारी गुरुद्वारे पर चढ़ाई जाती है। इस फुलकारी में सिर्फ फूलों का ही पैटर्न नहीं बल्की जानवर और इंसानों का भी पैटर्न होता है।

बावन फुलकारी– बावन यानी 52 तरह के अलग पैटर्न वाले किए गए काम को 52 फुलकारी कहते हैं।

कंटेंपरेरी फैशन में फुलकारी इंडियन डिजाइनर समय समय पर फुलकारी के साथ कुछ न कुछ एक्सपेरिमेंट करते ही रहते हैं पर आजकल फुलकारी बहुत अलग अलग तरह की आने लगी है। अब तो नेट फैब्रिक पर भी फुलकारी की कढ़ाई होती ही। या फुलकारी का प्रिंट मिल जाता है।

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